UNSC की बैठक में लड़ने लगे चीन और अमेरिका के प्रतिनिधि, पीएम मोदी कर रहे थे

नई दिल्ली: अमेरिका और चीन सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में समुद्री सुरक्षा पर एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान भिड़ गए। पीएम मोदी पहली बार यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल के स्थायी और अस्थाई सदस्यों ने हिस्सा लिया था और अगस्त महीने की अध्यक्षता भारत के पास है। वहीं, इस बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी हिस्सा लिया था, जबकि अमेरिका की तरफ से विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने हिस्सा लिया था। लेकिन, बैठक के दौरान अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों के बीच जमकर बहसबाजी शुरू हो गई। यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक के दौरान भारत ने ही बहस का एजेंडा तय किया था और ऐसा पहली बार हुआ है, जब यूएनएससी की बैठक में ”समुद्री सुरक्षा” को प्रमुख एजेंडे के तौर पर बहस का मुद्दा बनाय गया था। पीएम मोदी इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, लेकिन उसी समय चीन और अमेरिका के प्रतिनिधि आपस में भिड़ गये। बैठक के दौरान वाशिंगटन ने जोर देकर कहा कि, साउथ चायना सी में बीजिंग बार बार अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करता है, गैर कानूनी समुद्री दावों को आगे बढ़ाने के लिए चीन आक्रामक कार्रवाई करता है और इसका जवाब दिया जाना जरूरी है। अमेरिका ने जैसे ही बैठक में चीन को घेरना शुरू किया, ठीक वैसे ही चीन के प्रतिनिधि भड़ग गये और फिर दोनों देशों के बीच बहसबाजी होने लगी। चीन ने कहा कि अमेरिका ”गैर-जिम्मेदाराणा” टिप्पणी कर रहा है और वो ऐसा करने के लिए अधिकृत नहीं है।

यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि ”कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बारे में बात करना जरूरी है, जहां समुद्री नियमों और सिद्धातों को खतरा है”। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ”दक्षिण चीन सागर में हमने जहाजों के बीच खतरनाक मुठभेड़ों को देखा है और गैर कानूनी समुद्री दावों को आगे बढ़ाने के लिए हमने आक्रामक कार्रवाईयां देखी हैं”। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने सीधे-सीधे चीन की तरफ ऊंगली उठाते हुए कहा कि ”समुद्री सुरक्षा कानून तोड़ने और आक्रामक कार्रवाई करने का हक किसी को नहीं है”। आपको बता दें कि साउथ चायना सी, जिसे दक्षिण चीन सागर भी कहा जाता है, उसके पूरे हिस्से, करीब 1.3 मिलियन स्क्वायर मील पर अपना दावा ठोकता है, जबकि वियतनाम, हांगकांग, इंडोनेशिया, मलेशिया, ताइवान जैसे छोटे देशों का भी समुद्री कानून के हिसाब से साउथ चायना सी पर हिस्सा है, जिसे मानने से चीन इनकार कर रहा है। साउथ चायना सी में चीन कई मानवनिर्मित कृत्रिम सैन्य ठिकानों का निर्माण कर रहा है और जिन हिस्सों पर निर्माण कर रहा है, उसपर ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम भी दावा करते हैं। लेकिन, चीन अपने एयरक्राफ्ट कैरियर भेजकर सभी देशों को धमकाता रहता है। बैठक के दौरान अमेरिका ने काफी आक्रामकता के साथ चीन को घेरने की कोशिश की। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि ”संयुक्त राज्य अमेरिका ने उन देशों (चीन) और उन कामों के बारे में अपनी चिंताओं को स्पष्ट कर दिया है, जो अन्य राज्यों को अपने समुद्री संसाधनों को कानूनी रूप से इस्तेमाल करने से धमकाते हैं, दक्षिण चीन सागर के दूसरे दावेदारों के साथ हमने भी साउथ चायना सी में इस तरह के आक्रामक व्यवहार और गैरकानूनी समुद्री दावों का विरोध किया है”। इसके साथ ही एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि ”अगर कोई देश (चीन) ये सोचता है कि साउथ चायना सी से अमेरिका का क्या मतलब है और अमेरिका दखलअंदाजी क्यों कर रहा है, तो हम साफ कर देना चाहते हैं कि अमेरिका दूसरे देशों के अधिकारों की रक्षा करेगा और समुद्री सुरक्षा कानून के साथ खड़ा रहेगा”।

अमेरिका की बातों से बौखलाए चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि दाई बिंग ने बैठक में कहा कि ”हम यह बताना चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सही जगह नहीं है। अमेरिका ने अभी-अभी दक्षिण चीन सागर के मुद्दे का जिक्र किया और चीन इस कृत्य का कड़ा विरोध करता है। चीन के प्रतिनिधि ने कहा कि ”अभी दक्षिण चीन सागर में स्थिति स्थिर है और सभी देश समुद्री स्वतंत्रता का लाभ ले रहे हैं”। उन्होंने कहा कि ”बीजिंग दक्षिण चीन सागर में स्वतंत्रता और शांति को सुनिश्चित करने के पक्ष में है”। वाशिंगटन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ”अमेरिका खुद दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करने के योग्य नहीं है।” यूनाइटेड नेशंस में चीन के प्रतिनिधि ने कहा कि ”अमेरिका बिना किसी बात के परेशानी पैदा कर रहा है, मनमाने ढंग से अत्याधुनिक सैन्य जहाजों और विमानों को दक्षिण चीन सागर में चीन को उकसाने के लिए भेज रहा है और सार्वजनिक रूप से क्षेत्रीय देशों, विशेष रूप से संबंधित देशों के बीच विवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है”। चीन के प्रतिनिधिन ने कहा कि ”यह देश (अमेरिका) दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। अमेरिका खुद यूएनसीएलओएस (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन) में शामिल नहीं होता है, लेकिन खुद को अन्य देशों की ओर इशारा करते हुए कन्वेंशन का जज मानता है।” चीन ने कहा कि ”समुद्री मुद्दों पर वाशिंगटन की कोई विश्वसनीयता नहीं है।”

रिपोर्ट के मुताबिक चीन और अमेरिकन प्रतिनिधियों के बीच काफी तेज बहस होने लगी और बताया जा रहा है कि फ्रांस ने अमेरिका का पक्ष ले लिया। लेकिन, इस पूरी बहसबाजी के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन पूरी तरह से चुप रहे और बैठक के दौरान चीनी और अमेरिकन प्रतिनिधियों के बीच हो रही बहसबाजी को देखते रहे। वहीं, बैठक के अंत में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्लोजिंग स्टेटमेंट देते हुए कहा कि ”यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल अंतर्राष्ट्रीय कानून को लागू करवाने के पक्ष में है और यूनाइटेड नेशंस में 10 दिसंबर 1982 को समुद्री सुरक्षा के ऊपर यूएनएससी में कानून लागू किया गया था, जिसे सभी देशों को कानूनी तौर पर मानना चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए”।

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