गोवा में ऑक्सीजन की कमी से धड़ाधड़ मौतें, आपस में भिड़े मंत्रियों को नड्डा की नसीहत

नई दिल्ली: कोरोना की दूसरी लहर में गोवा में हालात काफी बिगड़ गए हैं। राज्य में ऑक्सीजन की कमी के कारण हाहाकार मचा हुआ है। पिछले चार दिनों के दौरान इलाज के अभाव और ऑक्सीजन की कमी के कारण 75 मरीज दम तोड़ चुके हैं। गोवा में बिगड़ते हालात के लिए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे के बीच उभरे मतभेदों को भी बड़ा कारण बताया जा रहा है।

गोवा भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच कोरोना संकट के दौरान मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। दोनों के मतभेद इतना ज्यादा बढ़ गए हैं कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को बीच में दखल देना पड़ा है। नड्डा ने सीएम और स्वास्थ्य मंत्री को समझाया। नड्डा ने दोनों नेताओं को कोरोना से लड़ने में ताकत लगाने और आपसी मतभेदों को दूर रखने की नसीहत दी है।

कोरोना संकट काल में गोवा में स्थिति काफी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि यहां विभिन्न अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण हाहाकार जैसी स्थिति दिख रही है। शुक्रवार को ऑक्सीजन की कमी के कारण 13 कोरोना मरीजों ने दम तोड़ दिया।

इसके पहले भी काफी संख्या में मरीजों की ऑक्सीजन की कमी के कारण जान जा चुकी है। जानकारों का कहना है कि पिछले 4 दिनों के अंदर ऑक्सीजन की कमी के कारण 75 मरीजों की मौत हुई है। हालांकि सरकार की ओर से ऑक्सीजन संकट को दूर करने का बड़ा दावा किया जा रहा है मगर हकीकत कुछ और है। ऑक्सीजन की कमी से हो रही मौतों के कारण लोगों में काफी नाराजगी भी दिख रही है।

राज्य में इस संकटपूर्ण स्थिति के दौरान मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणा के बीच कोई सामंजस्य नहीं दिख रहा है। भाजपा के इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के मतभेद को भी संकट के लिए बड़ा कारण माना जा रहा है। यही कारण है कि अब केंद्रीय नेतृत्व दखल देने पर मजबूर हुआ है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा ने दोनों नेताओं से अलग-अलग बातचीत की है और दोनों नेताओं को आपसी मतभेदों को तत्काल दूर करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे आपसी मतभेद के संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें।

नड्डा ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को सलाह दी कि दोनों को मिलकर राज्य में व्याप्त संकटपूर्ण स्थिति पर नियंत्रण पाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट काल में आपसी मतभेदों को भूलकर लोगों के जीवन को बचाने के लिए जुटना चाहिए। दोनों नेताओं को कोई नया विवाद पैदा न करने और आपसी समन्वय से काम करने की भी सलाह दी गई है।

गोवा भाजपा के एक नेता का कहना है कि दरअसल दोनों नेताओं के बीच अहम का टकराव है जिसके कारण विवाद पैदा हो गया है और सरकार की छवि खराब हो रही है। वैसे जानकारों का कहना है कि दोनों नेताओं के बीच विवाद कोई नया नहीं है मगर कोरोना संकट काल में यह उभरकर सामने आ गया है। अब इसे लेकर लोगों के बीच चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।

पार्टी नेतृत्व गोवा की स्थिति को लेकर इसलिए भी चिंतित और परेशान है क्योंकि पार्टी को अगले साल गोवा में विधानसभा का चुनाव लड़ना है। सियासी जानकारों का मानना है कि अगर सरकार कोरोना संकट को कायदे से नियंत्रित करने में कामयाब नहीं हुई तो चुनाव में भाजपा को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
गोवा को पहले कांग्रेस का गढ़ माना जाता था मगर अब भाजपा ने राज्य में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। यही कारण है कि भाजपा गोवा को अब अपने हाथ से नहीं निकलने देना चाहती। इसीलिए पार्टी नेतृत्व गोवा में पैदा हुई स्थितियों पर लगातार निगाह रखे हुए है।

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