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Uttar Pradesh: पुलिस और प्रशासन के लिए आने वाले दिन चुनौती भरे!

Uttar Pradesh भाजपा की प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा की विवादित टिप्पणी के बाद यूपी में माहौल लगातार गर्म हो रहा है। कानपुर से भड़की हिंसा अब दूसरे शहरों का रुख कर रही है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद यूपी के प्रयागराज, सहारनपुर और मुरादाबाद में हिंसा भड़की तो वहीं झारखंड की राजधानी रांची में भी जमकर बवाल हुआ। रांची में तो दो लोगों की मौत भी हो गई।

पिछले दिनों कानुपर और इसके बाद प्रयाराज में हुए बवाल की तस्वीरें बताती हैं कि दोनों जगहों पर उपद्रवियों का तरीका एक जैसा ही रहा। यूपी (Uttar Pradesh)के खुफिया विभाग ने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में यूपी के अन्य शहरों में भी उपद्रवी अपनी हरकतों को अंजाम दे सकते हैं। इसलिए पुलिस और प्रशासन के लिए आने वाले दिन चुनौती भरे होने की संभावना है।

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कानपुर और फिर प्रयागराज में हिंसा के लिए जुमे की नमाज के बाद ही समय चुना गया। इस दिन मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए लोग भारी संख्या में जुटते हैं। ऐसे में उपद्रव की साजिश रचने वालों को भीड़ जुटाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए अनावश्यक मशक्कत नहीं करनी पड़ी। फिर, एक-दूसरे को उकसा कर उन्हें हिंसा में शामिल कर लिया गया।

कानपुर और प्रयागराज में पुलिस और स्थानीय इंटेलिजेंस भले ही दावा करे कि उनकी ओर से सतर्कता बरती गई थी। मगर, हकीकत में पुलिस और स्थानीय इंटेलिजेंस से बड़ी चूक हुई। उपद्रवियों ने पहले से ही ईंट-पत्थर, बम और पेट्रोल बम इकट्‌ठा कर रखे थे। इसकी भनक पुलिस और इंटेलिजेंस को माहौल बिगड़ने के पहले नहीं लग पाई।

कानपुर में 3 जून को हिंसा की शुरुआत नई सड़क से हुई थी। वहीं, 10 जून को प्रयागराज में हिंसा की शुरुआत अटाला से हुई। दोनों ही शहरों के यह स्थान ऐसे हैं, जहां भारी भीड़ उमड़ने के बाद भी पर्याप्त संख्या में फोर्स नहीं तैनात की गई थी। नतीजतन, उपद्रवियों को हिंसा के लिए पर्याप्त समय और अवसर मिला और पुलिस काफी मशक्कत के बाद माहौल को सामान्य करने में सफल हुई।

कानपुर और प्रयागराज में जुमे के दिन हुई हिंसा में 15 से 17 साल के लड़के पथराव करने के दौरान सबसे आगे दिखे। यह सुनियोजित साजिश का एक अहम पहलू माना जा रहा है। हिंसा की साजिश रचने वालों को पूरा विश्वास था कि बच्चों को आगे देख पुलिस के रुख में नरमी आएगी और उन्हें उपद्रव की आग को फैलाने के लिए पर्याप्त अवसर मिलेगा।

कानपुर और प्रयागराज में हुई हिंसा में यह बात सामने आई है कि इसकी साजिश में शामिल रहे लोगों का नाता सीएए-एनआरसी प्रदर्शन से भी रहा है। भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा को लेकर देशव्यापी विरोध के बीच ऐसे लोगों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग नहीं की गई। नतीजतन, वही लोग भोले-भाले लोगों को हिंसा में शामिल होने के लिए उकसाने में सफल रहे।

कानपुर और फिर प्रयागराज में हिंसा से पहले वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया के अहम प्लेटफार्म का सहारा लिया गया। उसके सहारे धर्म विशेष के लोगों को फर्जी मैसेज भेज कर उनकी धार्मिक भावनाओं को भड़काया गया। यह मैसेज खासतौर से उन्हीं लोगों को भेजे गए जो सोशल मीडिया की हर खबर पर आसानी से आंख बंद कर भरोसा कर लेते हैं और उसके बारे में अन्य लोगों को भी बताते हैं।

कानपुर में हिंसा से पहले राज्य सरकार के आला अफसरों ने चेताया था कि हर छोटी-बड़ी घटना पर नजर रखी जाए। माहौल को भांपते रहें और तैयारी मुकम्मल रखें। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस-प्रशासनिक स्तर से लापरवाही हुई और उसका नतीजा उपद्रव के तौर पर देखने को मिला। कानपुर हिंसा के बाद एक बार फिर राज्य सरकार की ओर से सभी जिलों को अलर्ट किया गया था, लेकिन कानपुर की गलती प्रयागराज में भी दोहराई गई और शहर में बवाल हो गया। अलर्ट को गंभीरता से नहीं लिया गया।

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