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सलाखों के पीछे आज खत्म हो रहा सुशील का क्वारंटाइन पीरियड, बोला- तिहाड़ जेल में मेरी जान को है खतरा

नई दिल्ली: हरियाणा के 23 वर्षीय पहलवान सागर धनकड़ की हत्या के मामले में जेल भेजे गए पहलवान सुशील कुमार ने अपनी जान को खतरा बताया है। सुशील का कहना है कि, मुझे लॉरेंस बिश्नोई-काला जठेड़ी गैंग से खतरा है। लिहाजा मेरी सुरक्षा बढ़ाई जाए। बता दिया जाए कि, मंडोली जेल में सुशील की आज क्वारंटाइन की अवधि खत्म हो रही है। उसे अब जल्द एशिया की सबसे बड़ी जेल तिहाड़ में शिफ्ट किया जा सकता है। हालांकि देखा गया है कि, तिहाड़ के नाम से सुशील का माथा ठनकने लगता है। वह दिनभर अपनी सेल में चक्कर काटता रहता है। सुशील द्वारा जेल प्रशासन से कई खुद की जान को खतरा होने की बात कही गई है। मंडोली जेल में भी उसे गैंगस्टरों का डरा सताता है। तिहाड़ में पहले से ही उससे खुन्नस खाए कैदी बंद हैं। जिसके चलते जेल प्रशासन अब सुशील को रोहिणी जेल में शिफ्ट करने का विचार भी कर रहा है। गौरतलब है कि, बीते 23 मई को गिरफ्तार किए जाने के बाद 2 जून को सुशील को पुलिस रिमांड खत्म होने पर मंडोली जेल भेजा गया था। जहां जेल संख्या-15 में उसे अलग सेल के भीतर 14 दिन के लिए क्वारंटाइन किया गया था।

इससे पहले 11 जून को रोहिणी अदालत ने सुशील की न्यायिक हिरासत (ज्यूडिशियल कस्टडी) 14 दिन के लिए बढ़ा दी थी। उसके वकील की ओर से एक बार फिर सुशील की जान को लॉरेंस बिश्नोई-काला जठेड़ी गैंग से खतरा बताया गया। हालांकि, इस मंडोली जेल में सुशील की सुरक्षा की खातिर उचित इंतजाम किए गए। एक अधिकारी ने कहा कि, किसी भी कैदी को अगर खतरा होता है, तो जेल प्रशासन द्वारा उसकी सुरक्षा का बंदोबस्त किया जाता है।

अदालत पिछले दिनों सुशील की जेल में प्रोटीन डाइट की मांग को खारिज कर चुकी है। सुशील की मांग थी कि उसका पेट अन्य कैदियों की तरह मिल रही खुराक से नहीं भर पा रहा है। लिहाजा उसे आगामी टोक्यो ओलंपिक के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट, एक्सरसाइ बैंड और एक स्पेशल डाइट मुहैया कराई जाए। इस याचिका को अदालत ने यह कहकर खारिज कर दिया कि, ऐसी जरूरत नहीं दिख रही। जेल प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, जिस वार्ड में सुशील कुमार रहा, वहां उसे अन्य कैदियों की तरह ही 8 रोटियां, 2 कप चाय व 4 बिस्कुट के अलावा दाल और कुछ सब्जियां खाने को दी गईं। इस खाने को सुशील ने खुद के लिए नाकाफी बताया था। हालांकि, उसे अदालत से झटका मिला, जिससे साफ हो गया कि अब उसे वही खाना पड़ेगा जो जेल में बंद अन्य कैदी खा रहे हैं।

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