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आधी रात को पहलाज निहलानी को आने लगी थी खून की उल्टी, 28 दिन रहे भर्ती, अब करेंगे कानूनी कार्रवाई

मुंबई: फिल्म प्रोड्यूसर और डायरेक्टर पहलाज निहलानी पिछले कई दिनों से बीमार थे और वह जिंदगी व मौत के बीच जंग लड़ रहे थे। अहम बात यह है कि उन्हें कोरोना संक्रमण नहीं हुआ था। तकरीबन 28 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद आखिरकार निहलानी ठीक होकर अस्पताल से घर लौट आए हैं। दरअसल पहलाज निहलानी ने कुछ दिन पहले बाहर से खाना ऑर्डर किया था, जिसे खाने के बाद उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी और आधी रात को उन्हें खूनी उल्टी होने लगी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना के बारे में स्पॉटबॉय से बात करते हुए निहलानी ने कहा कि मैंने किसी को इस बारे में नहीं बताया, सिर्फ मेरे परिवार को इस बारे में पता था साथ ही शत्रुघन सिन्हा को क्योंकि वो भी परिवार हैं। जब पत्रकार ने मेरे घर के हर सदस्य को बार-बार फोन किया तब उसे सच की जानकारी मिली, वरना किसी को क्या परवाह पड़ी है। इंडस्ट्री में आप जिंदा हैं या मर गए किसी को इसकी परवाह नहीं है। खासकर कि ऐसे समय में जब कुछ भी निश्चित नहीं है।
जब निहलानी से पूछा गया कि आखिर हुआ क्या था तो उन्होंने बताया कि तकरीबन एक महीने पहले मैं घर पर अकेला था, मेरी पत्नी भी घर पर नहीं थी, तभी 7 मई को फिल्म की यूनिट के कुछ लोग घर आ गए। काफी देर हो चुकी थी, लिहाजा मैंने बाहर से खाना ऑर्डर किया। मेरा खाना पहले से ही बना हुआ था क्योंकि मैं कभी भी बाहर का खाना नहीं खाता हूं। लेकिन सभी के लिए पर्याप्त खाना नहीं था, लिहाजा ऑर्डर करना पड़ा। नॉन वेज में सिर्फ चिकन ही ऑर्डर किया गया था जिसे मैंने खाया था। लोगों ने मुझसे बार-बार कहा कि साथ में खाइए तो मैंने खा लिया। लेकिन जैसे ही मैने पहला निवाला खाया मुझे समझ आ गया था कि कुछ गड़बड़ है, लेकिन बाकी के लोगों ने यकीन दिलाया कि चिकन ठीक है कोई दिक्कत नहीं है तो मैंने खा लिया।

निहलानी ने बताया कि जैसे ही सभी लोग घर से गए मुझे उलझन होने लगी और उल्टी आने लगी, लेकिन उल्टी के बाद मुझे ठीक लग रहा था और मैंने सो गया। लेकिन रात तकरीबन 3 बजे मेरी नींद खुली मैंने फिर से उल्टी की और इस बार उल्टी में खून आने लगा। तब मैं घबरा गया और मैंने अपने बेटे को फोन किया जोकि इसी बिल्डिंग में रहता था और वह तुरंत मेरे पास आया। उसने डॉक्टर को बुलाया और उन्होंने मुझे सलाह दी कि आप तुरंत अस्पताल में भर्ती हो जाइए। जिसके बाद अगले 28 दिनों तक मैं नानावती अस्पताल में भर्ती था। किसी को भी महामारी की वजह से मुझसे मिलने की इजाजत नहीं थी, मैंने वीडियो कॉल से ही अपनी पत्नी से बात करता था। पहलाज निहलानी ने बताया कि मैं डॉक्टर जयंत बरवे का शुक्रगुजार हूं जिनकी वजह से एक घंटे के भीतर मेरा टेस्ट हो गया, मैं सौभाग्यशाली था कि उन्होंने मेरा इतना खयाल रखा, अगर मेरे परिवार और डॉक्टरों ने मेरा खयाल नहीं रखा होता तो शायद मैं मर गया होता। मैं मौत के मुंह से बाहर आया हूं। निहलानी ने कहा कि मुझे कोरोना नहीं हुआ था, पिछले साल अप्रैल माह में मुझे कोरोना हुआ था। मैं घर पर ही ठीक हो गया था। लेकिन यह उससे भी ज्यादा गंभीर था। मेरी जिंदगी में पहली बार मैं एडमिट हुआ था। किसी को नहीं पता था कि मैं जिंदा बचूंगा कि नहीं, मैं भगवान और परिवार की वजह से बच गया।

अस्पताल से ठीक होकर घर लौटने के बाद निहलानी ने कहा कि वह अब उस रेस्टोरेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे जिसने मुझे उस रात खाना भेजा था, उसकी वजह से मुझे इतने बुरे दिन देखने पड़े। यह मेरी जिंदगी का आखिरी खाना हो सकता था। जिसने भी उस रात खाना खाया था हर कोई बीमार पड़ गया था। लेकिन सबसे ज्यादा मैं बीमार हुआ था। मैं हर किसी से अपील करता हूं कि वह ऐसे मुश्किल समय में सिर्फ घर में पका हुआ खाना ही खाएं।

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