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जानिए क्या होता है ब्रेन डेड, जिससे कन्नड़ अभिनेता संचारी विजय की महज 38 साल में हुई मौत

नई दिल्ली: राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता और कन्नड़ अभिनेता संचारी विजय का निधन हो गया है। 38 वर्षीय अभिनेता संचारी विजय का शनिवार (13 जून) की रात एक्सीडेंट हो गया था, जिसके बाद उनकी ब्रेन की सर्जरी हुई थी। लेकिन सोमवार (13 जून) को उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। सर्जरी के बाद संचारी विजय कोमा में चले गए थे। ऐसे में आप सबके दिमाग में ये बात आ रही होगी कि आखिरी ब्रेन डेड क्या होता है, और ब्रेन डेड में गया शख्स जिंदा नहीं हो सकता है। तो बता दें कि ब्रेन डेड वह स्थिति है, जब दिमाग कोई भी प्रतिक्रिया नहीं देता है। दिमाग दैनिक प्रक्रिया जैसे, सांस लेना, आंखों की पुतलियों का रेस्पॉन्स और बॉडी मूवमेंट जैसी गतिविधियां करना बंद कर देता है।

यूके की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) की वेबसाइट के मुताबिक, ब्रेन डेथ को ब्रेन स्टेम डेथ के रूप में भी जाना जाता है। यह तब होता है, जब व्यक्ति का मस्तिष्क कोई कार्य नहीं करता है। इसका मतलब है कि वे होश में नहीं आएंगे या बिना मेडिकल मशीन (वेंटिलेटर) के सहारे के सांस नहीं ले पाएंगे। ब्रेन डेड व्यक्ति की कानूनी तौर पर मृत के रूप में पुष्टि की जाती है। वो ठीक नहीं हो सकते हैं क्योंकि उनका शरीर मेडिकल मशीन के सपोर्ट के बिना जीवित रहने में असमर्थ है। साफ शब्दों में कहे तो जब किसी व्यक्ति में ब्रेन डेड की स्थिति बनती है तो इसका मतलब है कि ब्रेन स्टेम का डेड होना। यानी मरीज का अपने रेस्पिरेट्री फंक्शन पर कंट्रोल नहीं होता है। उसे दर्द और किसी भी इमोशन का पता नहीं चलता है। ब्रेन डेड की स्थिति में शरीर के अंदर बाकी अंग, जैसे लीवर, किडनी, हार्ट काम करते हैं। इसे यूं कहें कि शरीर जिंदा रहता लेकिन आपकी चेतना मर जाती है।

यदि किसी का ब्रेन डेड हो जाता है, तो कई देशों में इसे व्यक्ति की मृत्यु मानी जाती है। ब्रेन स्टेम डेथ के निर्धारण पर भारतीय कानून स्पष्ट है। भारतीय कानून के मुताबिक ब्रेन स्टेम डेथ की घोषणा का अर्थ है किसी व्यक्ति को मेडिकली और कानूनी रूप से मृत घोषित करना। व्यावहारिक रूप में, ब्रेन स्टेम डेथ का प्रमाण और उसके बारे में रिश्तेदारों को समझाना आसान नहीं है। असल में ये भ्रमित करने वाली स्थिति होती है कि किसी को ब्रेन डेथ हुआ है… क्योंकि उनकी लाइफ सपोर्ट मशीन उनके दिल की धड़कन को बनाए रखती है, वेंटिलेटर से हर सांस के साथ उनकी छाती ऊपर और नीते होती है। लेकिन सच ये है कि वे कभी भी होश में नहीं आएंगे या फिर से अपने आप सांस लेना शुरू नहीं कर पाएंगे। वे पहले ही मर चुके होते हैं।

ब्रेन डेड पेशंट को सांस वेंटिलेटर से ही दी जाती है। उसका दिल धड़कता है, किडनी-लीवर काम करते हैं लेकिन रीर में मूवमेंट नहीं होता है। अगर आप आंखों पर तेज रोशनी भी डालेंगे तो पुतलियां किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं देती है। ब्रेन स्टेम मस्तिष्क का निचला हिस्सा होता है जो रीढ़ की हड्डी (रीढ़ की हड्डी के स्तंभ में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का हिस्सा) से जुड़ा होता है। ब्रेन स्टेम दिमाग के मध्यभाग का हिस्सा होता है। ब्रेन स्टेम शरीर के अधिकांश क्रियाओं और कार्यों का संचालन करता है। जिसमें शामिल है, सांस लेना, दिल की धड़कन,रक्तचाप, खाना खान, दर्द महसूस करना इत्यादी।

ब्रेन स्टेम मस्तिष्क से शरीर के बाकी हिस्सों तक सूचनाओं को भी पहुंचाता है, इसलिए यह मस्तिष्क के मुख्य कार्यों, जैसे चेतना, जागरूकता और गति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ब्रेन डेथ के बाद किसी के लिए होश में रहना संभव नहीं है। मस्तिष्क की मृत्यु तब हो सकती है जब मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है। ब्रेन डेथ के कई कारण हो सकते हैं। जैसे…

कार्डियक अरेस्ट- जब दिल धड़कना बंद कर देता है और दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
हार्ट अटैक- जब हृदय को रक्त की आपूर्ति अचानक बंद हो जाती है।
ब्लड क्लॉट (खून का थक्का जमना)- रक्त वाहिका में रुकावट जो आपके शरीर के चारों ओर रक्त के प्रवाह को बाधित करती है।
-इसके अलावा ब्रेथ डेथ सिर में गंभीर चोट, ब्रेन हैमरेज, इंसेफेलाइटिस जैसे संक्रमण और ब्रेन ट्यूमर से भी हो सकता है।

ब्रेन डेथ और अंग दान
ब्रेन डेथ के बाद अंग दान किया जा सकता है। ब्रेन डेथ के बाद व्यक्ति के अंगों को ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल करना संभव हो सकता है, जो अक्सर दूसरों की जान बचा सकता है। ऐसे मामलों में जहां एक मृत व्यक्ति ने अपनी इच्छा स्पष्ट नहीं की है, यह तय करना कि उनके अंग दान करना है या नहीं, परिवार वालों का फैसला होता है।

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