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गर्व की बात: भारतीय वैज्ञानिक बिटिया करेगी मदद, तब चांद पर इंसानों को उतारेगा NASA

वॉशिंगटन: भारत के वैज्ञानिक अमेरिकन स्पेस एजेंसी नासा में बड़ी बड़ी कामयाबियों को अंजाम देकर दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। अमेरिका ने हालिया समय में कई ऐसे मिशन को अंजाम दिया है, जिसकी बागडोर भारतीय वैज्ञानिकों के हाथ में थी। आपको भारतीय मूल की वैज्ञानिक स्वाति मोहन याद होंगी, जिन्होंने मंगल ग्रह पर नासा के पर्सिवरेंस रोबोट को कामयाबी के साथ उतारा था और आपको बॉब बालाराम भी याद होंगे, जिन्होंने मंगल ग्रह पर नासा के हेलिकॉप्टर को सफलतापूर्वक उड़ाने में कामयाबी हासिल की थी और अब इसी कड़ी में भारत की एक और बेटी सुबाशिनी अय्यर का नाम जुट गया है, जो नासा के बेहद महत्वपूर्ण आर्टिमिस मिशन में मदद करने जा रही हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय मूल की इंजीनियर सुबाशिनी अय्यर नासा के बेहद लोकप्रिय मून मिशन आर्टिमिस मिशन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस मिशन के तहत चंद्रमा पर नासा एक बार फिर से इंसानों को उतारने जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक नासा के इस मून मिशन में सुबाशिनी अय्यर रॉकेट के कोर स्टेज का काम संभाल रही हैं, जो इस मिशन के लिए रीढ़ की हड्डी के सामान है। आर्टिमिस मिशन नासा का महत्वाकांक्षी परियोजना है और इसके पहले चरण की देखरेख इंजीनियर सुबाशिनी अय्यर कर रही हैं।

नासा के आर्टिमिस मिशन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सुबाशिनी अय्यर भारत के कोयंबटूर की मूल रूप से रहने वाली हैं और पिछले दो सालों से नासा के मून मिशन के स्पेस लॉंच सिस्टम यानि एसएलसी प्रोजेक्ट के लिए काम कर रही हैं। 1992 में सुबाशिनी अय्यर अपने कॉलेज की पहली लड़की थीं, जिन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की थी। उन्होंने वीएलबी जानकीमल कॉलेज तामिलनाडु से पढ़ाई की है और अब नासा के एसएलसी प्रोजेक्ट को लीड कर रही हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ‘अब करीब 50 साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है, जब हमने आखिरी बार चांद पर अपना कदम रखा था और हम एक बार फिर से चांद पर इंसानों को भेजने के लिए तैयारी कर रहे हैं।’

सुबाशिनी अय्यर बताती हैं कि ‘नासा का मिशन आर्टिमिस-1 बिना वैज्ञानिक के चांद पर जाने वाला स्पेसक्राफ्ट ओरियन है। जो चांद को लेकर बनाए गये चीन बेहद जटिल मिशनों का पहला हिस्सा है। इसके तहत हम चांद की सतह पर उतरेंगे और मार्स के सतह पर भी हमारी उतरने की योजना है। स्पेसक्राफ्ट ओरियन पृथ्वी से करीब 4 लाख 50 हजार किलोमीटर का सफर तय करेगा, जो चंद्रमा की सतह से भी आगे का होगा और हमारा ये मिशन 3 हफ्तों का है।’ उन्होंने कहा कि ‘आर्टिमिस-1 मिशन के दौरान स्पेसक्राफ्ट ओरियन चंद्रमा पर और उससे भी हजारों किलोमीटर आगे जाएगा और वहां से हमें अलग अलग तरह के डेटा और जानकारियां भेजेगा। इसके साथ ही हम ओरियन स्पेसक्राफ्ट की क्षमता की भी जांच करेंगे कि क्या इस स्पेसक्राफ्ट से इंसानों को चांद पर भेजा जा सकता है? ओरियन स्पेसक्राफ्ट का पहला मिशन, आर्टिमिस-2 मिशन का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा और हम 2024 में चांद पर आर्टिमिस-2 मिशन में इंसानों को चांद पर उतारेंगे।’

सुबाशिनी अय्यर नासा के आर्टिमिश-1 मिशन के लॉन्च इंटीग्रेटेड प्रोडक्ट टीम को लीड कर रही हैं, जिसकी जिम्मेदारी आर्टिमिस-1 के लिए अलग अलग पार्ट बनाना है, जो ओरियन स्पेसक्राफ्ट को स्पेस लॉन्च सिस्टम यानि एसएलसी द्वारा अंतरिक्ष में ले जाएगा। नासा के इस मिशन के तहत एक महिला और एक पुरूष को चंद्रमा पर भेजेगा। अपने इस मिशन को अंजाम देने किए नासा अलग अलग देशों के स्पेस स्टेशन के साथ भी मिलकर काम कर रहा है। नासा का कहना है कि अगर आर्टिमिस मिशन कामयाब रहता है तो उसके बाद मून मिशन के लिए अगली रूप-रेखा तैयार की जाएगी।

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