कोरोना की उत्पत्ति पर ग्लोबल स्टडी करेगा WHO, भारत खुश-चीन नाराज

नई दिल्ली: दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में एक अज्ञात बीमारी फैली, जिसको बाद में कोविड-19 नाम दिया गया। जब तक वैज्ञानिक इस बीमारी के बारे में ठोस जानकारी इकट्ठा करते, तब तक यात्रियों के जरिए ये वायरस दुनियाभर में फैल गया। चीन का दावा है कि वुहान के मीट मार्केट से ही ये इंसानों में आया, लेकिन कुछ विशेषज्ञ इसे लैब में बना हुआ बताते हैं। इसी के चलते WHO ने कोरोना के वैश्विक अध्ययन (ग्लोबल स्टडी ) की बात कही है।

WHO के मुताबिक उन्होंने फैसला लिया है कि कोरोना की उत्पत्ति पर एक वैश्विक अध्ययन किया जाएगा, ताकी ये पता चल सके कि कोरोना वायरस कब, कहां और कैसे आया। अब भारत सरकार ने भी इस फैसले का समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक कोरोना की उत्पत्ति पर वैश्विक अध्ययन एक अच्छा फैसला है। इससे कोरोना के बारे में और ज्यादा जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा वैज्ञानिक भी इसका सटीक इलाज खोज पाएंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने खुफिया एजेंसियों को 90 दिनों के अंदर ये पता लगाने का आदेश दिया है कि कोरोना वायरस कहां से फैला। इसके अलावा अमेरिकी स्वास्थ्य मंत्री ने साफ तौर पर WHO से कहा था कि कोरोना की उत्पत्ति कहां से हुई, इसकी जांच का अगला चरण पारदर्शी होना चाहिए। हालांकि इस आदेश के बाद चीन चिढ़ा हुआ है। अमेरिका में चीनी राजदूत ने कहा कि कोरोना पर राजनीति करने से बहुत ही बुरा असर पढ़ेगा।

एक खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस वुहान की लैब से लीक हुआ है। वहां पर नवंबर में ही लैब के तीन सदस्यों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, क्योंकि उनमें कोरोना जैसे ही लक्षण थे। वहीं जब WHO की टीम सच का पता लगाने वुहान गई थी, तो भी चीन ने कई सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी।

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