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हमें केवल 51 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने की जरूरत… और यह 2-3 महीनों में संभव हो सकता है यदि…: डॉ. शेट्टी

नई दिल्ली: नारायण हेल्थ के चेयरपर्सन डॉ. देवी शेट्टी ने इंडिया टुडे को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि अगले दो-तीन महीनों में कोरोना की तीसरी लहर से भारतीय लोगों को बचाने के लिए टीकाकरण की एकमात्र प्रभावी और किफायती समाधान है। डॉ शेट्टी मेडिकल ऑक्सीजन के वितरण के लिए एक वैज्ञानिक तंत्र तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सदस्य हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत को केवल 51 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने की जरूरत है और यह अगले 2 से 3 महीनों में किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि, ‘भारत के लिहाज से कोरोना महामारी पर विजय पाना कठिन नहीं है। टीकाकरण कोरोना से बचने का सबसे बढ़िया और किफायती समाधान है और यह साबित हो चुका है कि टीकाकरण काम करता है। हमें केवल 18 साल से ऊपर के लोगों का टीकाकरण करना है।’

कोरोना की तीसरी लहर से बचने का क्या तरीका है इस बात का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत को तत्काल ऐसे डॉक्टरों और नर्सों की कमी को पूरा करने की जरूरत है जो कोरोना मरीजों की बेहतर देखभाल कर सकें। अगर आप उनकी बढ़िया से बढ़िया देखभाल करेंगे तो मृत्यु दर काफी कम हो जाएगी।

प्रश्न- हमने 2-3 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण कर दिया है। हम कम समय में इतनी बड़ी आबादी का टीकाकरण कैसे करने जा रहे हैं?

उत्तर. डॉ. शेट्टी ने कहा कि सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि हमारे पास एक बड़ी आबादी है, लेकिन हमारे पर स्रोत भी प्रचूर मात्रा में हैं। एक दिन के लॉकडाउन का देश पर 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का खर्च आता है। हमें केवल 51 करोड़ लोगों का टीकाकरण करना है। 13 करोड़ लोगों को कोरोना की पहली डोज दी जा चुकी है। इस समय 18 से कम उम्र के लोगों को नहीं गिनना है क्योंकि उनको वैक्सीन लगाने की फिलहाल अनुमति नहीं मिली है और उन्हें छोड़ दें तो हमें केवल 51 करोड़ लोगों का टीकाकरण करना है और इसे करने का खर्च 70 हजार करोड़ रुपये से कम आएगा।
अगर हम विश्व के उच्च वैक्सीन निर्माताओं को यह कहें कि हम आपको 10 हजार करोड़ रुपए एडवांस देंगे तो वे वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए सब कुछ करेंगे। 70 हजार करोड़ हमारे जैसे देश के लिए कुछ भी नहीं हैं। हमारी जीडीपी 200 लाख करोड़ की है। इसके बाद हम 2-3 महीने में 51 करोड़ लोगों का टीकाकरण कर सकते हैं।

प्रश्न- हम रातों रात वैक्सीन का उत्पादन नहीं बढ़ा सकते। और खतरा यह है कि तीसरी लहर बच्चों और युवा दंपति को भी प्रभावित करेगी। क्या इस समूह पर भी खतरा हो सकता है?

उत्तर- हमने यह देखा कि कोरोना की पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में बच्चे ज्यादा प्रभावित हुए। समय के साथ, अधिक से अधिक वयस्कों को या तो टीका लगाया जाएगा या वे संक्रमित हो जाएंगे और अगर इस उम्र के लोगों में वायरस फैला तो यह बेहद ही घातक होगा। अभी 18 साल से कम उम्र के लोगों को वैक्सीन नहीं दी जा रही है, लेकिन हमारा मानना है कि उन्हें भी खतरा है और हमें इस पर जल्द एक्शन लेना होगा। अगर आप युवा दंपति को जल्द से जल्द टीका नहीं लगाते हैं तो स्थिति बहुत गंभीर हो जाएगी।

प्रश्न- क्या आप वैक्सीन की केंद्रीकृत खरीद का समर्थन करते हैं?

उत्तर- हां, अगर हर राज्य सरकार और हर नगर पालिका वैक्सीन कंपनियों के साथ बातचीत करना चाहती है, तो जाहिर है कि वैक्सीन की कीमत वह नहीं रहेगी जो फिलहाल है।

प्रश्न: वैक्सीन के अलावा भारत डॉक्टरों और नर्सों की कमीं से जूझ रहा है। इसका क्या समाझान है?

उत्तर: हमारे पास एक से डेढ़ लाख ऐसे कुशल डॉक्टर हैं जो फिलहाल किसी भी अस्पताल में काम नहीं कर रहे हैं। ये डॉक्टर घर बैठकर नीट की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।हमें इन्हें कोरोना काल में सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। जैसे कि जो डॉक्टर 3 महीने कोविड आईसीयू में बिताता है तो उसे नीट की परीक्षा में 15% का ग्रेस दिया जाए। इसके बाद वे जरूर आएंगे। अगर आप उनसे कहोगे कि हम आपको 1 लाख रुपए की सैलरी देंगे तो वे नहीं आएंगे। आखिर कोरोना को लेकर कौन रिस्क लेना चाहता है। सरकार को यह समझना होगा की कोविड आईसीयू कोई शानदार जगह नहीं है।

हमें इन युवा डॉक्टरों को अच्छा प्रोत्साहन देना होगा। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 80 हजार डॉक्टर ऐसे हैं तो विदेशों से एमबीबीएस कर रहे हैं और भारत में प्रेक्टिस नहीं कर सकते। वे प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। अगर मैं भी आज वह प्रवेश परीक्षा दूं तो मैं भी उसे क्लियर नहीं कर सकता। इन डॉक्टरों को प्रोत्साहित करें उन्हें कोविद -19 ड्यूटी करने के लिए कुछ अनुग्रह अंक दें। डॉक्टरों के अलावा लाखों ऐसी नर्सें हैं जिन्होंने अपनी बी.एससी पूरी कर ली है लेकिन वे कहीं काम नहीं कर रही है। उन्हें भी कोरोना में ड्यूटी करने के लिए प्रोत्साहित करें।

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