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Sero survey: क्यों-कैसे होता है सीरो सर्वे? हरियाणा में अब लिए जाएंगे 6 साल से ऊपर

चंडीगढ़: प्रदेश की आबादी में कोरोना वायरस के संक्रमण के स्तर का पता लगाने और लोगों की इम्युनिटी का अंदाजा लगाने के लिए आज से सीरो सर्वे का तीसरा चरण शुरू हो गया है। इसकी तैयारियां हरियाणा में पिछले कई दिनों से की जा रही थीं। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने बताया कि, इसके लिए जिलास्तर पर टीमों का गठन कर उन्‍हें ट्रेनिंग दी गई, अब ये टीमें सर्वे के लिए सैंपल जुटाएंगी। उन्होंने कहा, “हमारे सीरो सर्वे के तीसरे चरण में 6 साल से ऊपर के बच्चे भी शामिल होंगे, ताकि तीसरी लहर से पहले बच्चों में भी कोरोना को लेकर एक अनुमान सामने आ सके।” सीरो सर्वे को जरूरी बताते हुए हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) राजीव अरोड़ा ने कहा कि, इस सर्वे से दूसरी लहर के प्रभाव का भी आकलन हो जाएगा कि अब तक कितने प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी बन चुकी है। उन्‍होंने कहा, “यह बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य जांचने के साथ ही हमारी बाल चिकित्सा सेवाओं की योजना बनाने और उन्हें मजबूत करने में भी मदद करेगा। यह सर्वे राज्य में अतिसंवेदनशील आबादी और क्षेत्रों को चिह्नित करेगा और उन क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान को प्राथमिकता देने या न देने में भी हमारी मदद करेगा।”

राजीव अरोड़ा के मुताबिक, हरियाणा में इससे पहले दो चरणों का सीरो सर्वेक्षण हुआ था। अगस्त में आयोजित किए गए इसके पहले चरण में सेरोप्रेवलेंस 8% पाया गया था। जो कि अक्टूबर में बढ़कर 14.8% हो गया था। सरकार यह समझने में मदद मिली कि कोरोना वायरस का प्रकोप आबादी के बड़े हिस्से को चपेट में लेगा। अब सीरो सर्वेक्षण के तीसरे चरण के बारे में अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) का कहना है कि, यह लोगों पर कोरोनावायरस महामारी की दूसरी लहर के प्रभाव का आंकलन करने के लिए भी किया जा रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पिछले सप्ताह यह भी कहा था कि, इस सर्वे से टीकाकरण के प्रभाव और दुष्‍प्रभाव को समझने में मदद मिलेगी। बहरहाल, लोगों के मन में यह सवाल ज्यादा उठ रहा है कि सीरो सर्वे आखिर होता क्या है और यह कैसे किया जाता है, इसके लिए सैंपल देना भला क्यों जरूरी है.. ऐसे ही कई प्रश्नों के जवाब लोग जानना चाहते हैं। आज Hindi.oneindia.com आपको सीरो सर्वे से जुड़ी बातें विस्तार से बता रहा है।

सीरो सर्वे कोरोना महामारी से संबंधित है। जिसमें कोरोना संक्रमण के अज्ञात मामलों का पता लगाने के लिए सीरो सर्वेक्षण के तहत लोगों से उनके रक्त के सैंपल लिए जाते हैं। सीरो सर्वे के तहत रक्त के सैंपल का टेस्ट लोगों में आईजीजी (इम्युनोग्लोबुलिन जी) एंटीबॉडीज की मौजूदगी का पता के लिए किया जाता है, जो वायरस के संक्रमण से बचाव पर बल देते हैं। सीरो सर्वेक्षण यह निर्धारित करने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं कि क्या कोई बीमारी सामुदायिक संचरण चरण यानी कि आबादी के बड़े हिस्से में प्रवेश कर चुकी है। हरियाणा के एक स्वास्थ्य कर्मचारी ने बताया कि, यह कोरोनावायरस के संक्रमण के स्तर का आंकलन करने या पहले ही संक्रमण से प्रभावित हो चुके इलाकों में उसके असर और सक्रियता को समझने, लोगों की इम्युनिटी का अंदाजा लगाने, टीकाकरण के बाद आए बदलाव को समझने, आयु वर्ग में संक्रमण की दर का पता लगाने जैसे बातों के लिए किया जा रहा है। इस तरह के सर्वे को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा अनुमोदित किया गया है। आईसीएमआर देश में अब तक इसके तीन चरण पूरे करवा चुका है। दरअसल, एक सीरोलॉजिकल सर्वे में एलिसा टेस्ट (आईजीजी एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट ऐसे) शामिल होते हैं। यह Sars-Cov-2 संक्रमण के संपर्क में आने वाली आबादी के अनुपात का अनुमान लगाता है। आईजीजी परीक्षण तीव्र संक्रमण का पता लगाने के लिए उपयोगी नहीं है, लेकिन यह अतीत में हुए संक्रमणों के एपिसोड को इंगित करता है।

भारत में पहले सीरो सर्वेक्षण पिछले साल मई में किए गए थे। तब सर्वेक्षणों ने यह जाहिर किया था कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा वायरस के संक्रमण हेतु अतिसंवेदनशील था, और उससे निपटने के लिए लोगों में इम्‍युनिटी क्षमता का अभाव था। पहले चरण के सर्वे को 21 राज्यों के 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्कों के क्रॉस-सेक्शनल सर्वेक्षण के रूप में डिजाइन किया गया था, जहां जिलों को प्रति मिलियन जनसंख्या पर रिपोर्ट किए गए कोरोना के मामलों के अनुसार 4 स्तरों में बांटा गया था। पहले सीरो सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण दर 0.73% पाई गई थी। जबकि, दूसरे में अगस्त 2020 तक 15 में से एक (6.6%) 10 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को वायरस के संपर्क में पाया गया। 17 दिसंबर, 2020 और 8 जनवरी, 2021 के बीच किए गए तीसरे सीरो सर्वेक्षण में 10 वर्ष और उससे अधिक आयु के 21.4% लोग वायरस से संक्रमित पाए गए। दूसरे और तीसरे चरण में, आयु वर्ग को छोड़कर अन्य सभी पैरामीटर समान थे- जिसके लिए 10 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों से सैंपल लिए गए थे।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की ओर से चौथे चरण का सीरो सर्वे, इस महीने 21 राज्यों के 70 जिलों में शुरू होगा। इन जिलों के जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों के रक्त के नमूने भी लिए जाएंगे। यह सर्वे Sars-CoV-2 के प्रसार का पता लगाने के लिए होगा, जोकि कोरोना फैलने का कारण माना जाता है।

जिन राज्यों में आगामी सीरो सर्वे के लिए सैंपल एकत्र किए जाएंगे, उनमें आंध्र प्रदेश (कृष्णा, एसपीएसआर नेल्लोर, विजयनगरम), असम (उदालगुरी, कामरूप मेट्रोपॉलिटन, करबियांगलोंग), बिहार (मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, बेगूसराय, मधुबनी, बक्सर, अरवल), छत्तीसगढ़ ( बीजापुर, कबीरधाम, सरगुजा), गुजरात (महिसागर, नर्मदा, सबर कांथा), झारखंड (लतेहार, पाकुड़, सिमडेगा), कर्नाटक (बेंगलुरु शहरी, चित्रदुर्ग, कालाबुरागी), केरल (पलक्कड़, एर्नाकुलम, त्रिशूर), मध्य प्रदेश (देवास, उज्जैन, ग्वालियर), महाराष्ट्र (बीड, नांदेड़, परभणी, जलगांव, अहमदनगर, सांगली), ओडिशा (रायगड़ा, गंजम, कोरापुट), पंजाब (गुरदासपुर, जालंधर), हरियाणा (कुरुक्षेत्र), राजस्थान (दौसा, जालोर, राजसमंद), तमिलनाडु (तिरुवन्नामलाई, कोयंबटूर, चेन्नई), तेलंगाना (कामारेड्डी, जंगों, नलगोंडा), और उत्तर प्रदेश (अमरोहा) आदि शामिल हैं।

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