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मैसूर DC पर ‘उत्पीड़न’ का आरोप लगा निगम आयुक्त ने दिया इस्तीफा,जानें 2 महिला IAS अफसरों में क्यों हो रहा विवाद

मैसूर: कोविड-19 प्रबंधन को लेकर कर्नाटक के मैसूर की डिप्टी कमिश्नर रोहिणी सिंधुरी और नगर निगम आयुक्त (एमसीसी) शिल्पा नाग के बीच चल रहा विवाद बढ़ता ही जा रहा है। गुरुवार (03) जून को मामला उस वक्त ज्यादा बढ़ गया जब मैसूर नगर निगम आयुक्त शिल्पा नाग ने डिप्टी कमिश्नर रोहिणी सिंधुरी पर ‘उत्पीड़न’ का आरोप लगा इस्तीफा दिया। शिल्पा नाग 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। वहीं रोहिणी सिंधुरी 2009 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। मैसूर जिले के प्रभारी मंत्री एसटी सोमशेखर ने कहा कि कर्नाटक सरकार शिल्पा नाग का इस्तीफा स्वीकार नहीं करेगी और वह आज (04 जून) को मैसूर जाएंगे और उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मनाएंगे। सटी सोमशेखर ने कहा, ‘शिल्पा नाग ने अच्छा काम किया है। मैं इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और मुख्य सचिव से बात करूंगा।’ आइए जानें कि आखिर दो महिला आईएएस अफसरों के बीच ये विवाद क्यों हो रहा है।

मैसूर नगर निगम आयुक्त शिल्पा नाग ने एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फेंस बुलाया और उसमें मैसूर डिप्टी कमिश्नर रोहिणी सिंधुरी पर गंभीर आरोप लगाए। आईएएस अफसर शिल्पा नाग ने कहा, ”डीसी (रोहिणी सिंधुरी) द्वारा उत्पीड़न और अपमान किया जा रहा है। मुझे पिछले एक सप्ताह से न मानसिक शांति है, न सही से नींद ले पा रही हूं और ना ही खाना खा पा रही हूं। मैंने बेहद दुख के साथ इस्तीफा देने का फैसला लिया है। मैंने इस संबंध में मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। किसी को अपने गौरव के लिए जिले या शहर को दांव पर नहीं लगाना चाहिए। किसी भी जिले या शहर में ऐसा अधिकारी नहीं होना चाहिए। वह ( रोहिणी सिंधुरी) एमसीसी कर्मचारियों को अपमानित कर रही हैं और उन्हें निलंबित करने की धमकी दे रही हैं।”

शिल्पा नाग ने आरोप लगाया, ”रोहिणी सिंधुरी लगातार उच्चाधिकारियों से शिकायत कर रही हैं कि एमसीसी में कोई काम नहीं हो रहा है। मैसूर में काम करने के लिए अनुकूल माहौल नहीं है… मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे रही हूं। मैं आपसे इस्तीफा स्वीकार करने और मुझे नैतिक दुविधा, दर्द और दुख से मुक्त करने का अनुरोध करती हूं।” शिल्पा नाग ने आरोप लगाया कि सिंधुरी को उनके खिलाफ एक शिकायत थी और मैसूर शहर में कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए उन्हें मिल रही प्रशंसा से नाराज हैं।
शिल्पा नाग ने कहा, “एमसीसी के अन्य अधिकारियों को निशाना बनाने के बजाय जो दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, डीसी को मेरा सामना करने दें। 31 मई तक, एमसीसी के केवल दो वार्ड रेड जोन में थे। लेकिन बुधवार को डीसी की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकांश वार्डों को रेड जोन में दिखाया गया है। डीसी दहशत पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। एमसीसी ने कई पहल की हैं लेकिन हमने जानकर टारगेट किया जा रहा है। जिला प्रशासन पहल के लिए श्रेय का दावा कर रही हैं।”

शिल्पा नाग ने कहा, ”डीसी ने कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) फंड प्राप्त नहीं करने का आदेश दिया है। एक सहायक पर्यावरण अभियंता ने सीएसआर के तहत धन जुटाने की पहल की थी लेकिन उन्हें निशाना बनाया गया और डीसी उन्हें निलंबित करने की तैयारी कर रही हैं।” शिल्पा नाग के आरोपों से इनकार करते हुए डिप्टी कमिश्नर रोहिणी सिंधुरी ने एक प्रेस बयान में कहा कि वह कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई पर ध्यान केंद्रित कर रही थीं। रोहिणी सिंधुरी ने कहा, ‘असल में, शिल्पा नाग ने डीसी द्वारा बुलाई गई कोविड-19 समीक्षा बैठकों में भाग लेना बंद कर दिया था। एमसीसी नए मामलों, मौतों और सक्रिय मामलों पर वार्डवार कोविड के विरोधाभासी आंकड़े प्रस्तुत कर रहा था। मैंने एक सुधार का आदेश दिया था। लेकिन पिछले 10 दिनों से, शिल्पा जिला प्रशासन के खिलाफ मीडिया को बयान जारी कर रही हैं। मुझे एक मैसूर नगर निगम आयुक्त से इस तरह की आचरण की उम्मीद नहीं थी”

सिंधुरी ने शिल्पा नाग पर कोविड केयर सेंटर स्थापित करने में विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि पूरे जिले के लिए सीएसआर फंड पूरी तरह से एमसीसी पर खर्च किया गया था। डीसी सिंधुरी ने कहा, ‘अगर किसी अधिकारी को कोई समस्या है, तो उसे वरिष्ठों के संज्ञान में लाना चाहिए। इस तरह प्रेस कांफ्रेंस के जरिए उत्पीड़न कहना गैरजरूरी है।’ सिंधुरी ने कहा कि उन्होंने आयुक्त (शिल्पा नाग) से शहर में ग्रामीण मैसूर के कोविड प्रबंधन मॉडल का पालन करने और अधिक कोविड देखभाल केंद्र खोलने के लिए कहा था। डीसी ने आरोप लगाया कि एमसीसी हाल तक एक भी कोविड केयर सेंटर खोलने में विफल रही। क्या आप लोग इसे उत्पीड़न कहेंगे। इसे उत्पीड़न कैसे हुआ है।

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