भारतीयों को कोरोना से लड़ना है तो इस ‘वायरस’ से भी रहना होगा सावधान, अमेरिका के सर्जन जरनल की बड़ी चेतावनी

भारतीयों को कोरोना से लड़ना है तो इस ‘वायरस’ से भी रहना होगा सावधान, अमेरिका के सर्जन जरनल की बड़ी चेतावनी

वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका के सर्जन जनरल विवेक मूर्ति ने भारत में कोरोना के खिलाफ जंग को लेकर बहुत बड़ी चेतावनी दी है और कुछ सलाह भी दिए हैं। भारतीय मूल के अमेरिका के सबसे बड़े डॉक्टर ने भारतीय अमेरिकियों और भारतीयों से कहा है कि दूसरी लहर की तबाही के दौरान ज्यादा सजग और सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कोविड से संबंधित गलत जानकारियों को लेकर सबको सावधान किया है और कहा है कि आप जो कुछ भी पढ़ रहे हैं, कह रहे हैं या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फॉर्वर्ड कर रहे हैं, उनमें शामिल गलत खबरें भी किसी ‘वायरस’ से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका और भारत दोनों इस समस्या का सामना कर रहे हैं।

अमेरिका के सर्जन जनरल विवेक मूर्ति ने भारत के सामने पैदा हुई अबतक के सबसे बड़े स्वास्थ्य संकट को लेकर भारतीय अमेरिकियों के साथ वर्चुअल कार्यक्रम में गलत और झूठी खबरों से जुड़े खतरों को लेकर आगाह किया है। उन्होंने कहा है, ‘गलत जानकारी अपने आप में एक वायरस है, और इससे लोगों को नुकसान होता है और कई बार इसकी वजह कुछ ऐसा काम हो जाता है, जिससे वो और दूसरे लोग भी जोखिम में पड़ जाते हैं।’ उनका कहना है कि ‘महामारी के समय जब आप कुछ कहते हैं, जानकारी एक ताकत होती है और अगर आप लोगों को सही जानकारी देते हैं तो उससे वह सही कदम उठा सकते हैं और खुद की रक्षा कर सकते हैं।’ लेकिन, गलत सूचनाओं और जानकारियों की वजह से यह बहुत खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती है। उनके मुताबिक सरकार और प्राइवेट सेक्टर लोगों के लिए हर वैक्सीन और मास्क तो उपलब्ध करवा सकते हैं, जैसे वो चाहते हैं। लेकिन ‘उसका कोई वजूद नहीं है, जब लोग उसका इस्तेमाल ही नहीं करेंगे, क्योंकि उसके बारे में उनके पास गलत जानकारी है।’

दरअसल, अमेरिका और भारत दोनों देश कोविड-19 महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। दोनों देश दुनिया में सबसे ज्यादा संक्रमण और मौतों के मामले में क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर हैं। इन दोनों देशों ने ही गलत जानकारियों की वजह से भी बहुत ही ज्यादा परेशानिया झेली हैं, जिनमें से कई तो जानबूझकर हालात बिगाड़ने के इरादे से फैलाई गई हैं। इसका परिणाम ये हुआ कि दोनों देशों में बहुत सारे लोगों ने कोविड-19 को बड़े हल्के में लिया। वैक्सीन को लेकर भी जानबूझकर संदेह पैदा की गई और मास्क लगाने की अहमियत समझने के लिए भी बहुत सारे लोग तैयार नहीं हुए। कोरोना को लेकर गलत सूचनाओं ने इसके खिलाफ लड़ाई को कितना कमजोर किया है, इसके बारे में अमेरिका के सबसे बड़े स्वास्थ्य अधिकारी की यह पहली टिप्पणी है, जिसकी वजह से अमेरिका को भी नुकसान हुआ है और भारत भी तबाही झेलने को मजबूर हुआ है। अमेरिकी सरकार अबतक करीब 10 करोड़ डॉलर वहां का प्राइवेट सेक्टर 40 करोड़ डॉलर की सहायता भारत भेज चुका है।

अमेरिका के टॉप डॉक्टर ने निजी तौर पर दोनों देशों की जनता की सोच को सामने रखकर उनसे जाने-अनजाने में हुई कुछ भूल की ओर इशारा किया है। जैसे कि कुछ अमेरिकियों को एक समय ऐसा लगता था कि एंटी-वायरल दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन में जादूई क्षमता है और वह इसी से कोरोना वायरस को भगा देंगे। इसी तरह कई भारतीय यह मानकर चल रहे थे कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए उनमें प्राकृतिक तौर पर मजबूत प्रतिरोधक क्षमता है। उन्होंने इस परेशानी को जाहिर करने के लिए अपने माता-पिता का हवाला दिया है, जो कर्नाटक से ब्रिटेन होते हुए अमेरिका में पहुंचे थे। उन्होंने कहा, ‘मेरे माता-पिता, अपने जेनरेशन के बाकी दूसरे प्रवासी भारतीयों की तरह व्हाट्सऐप ग्रुप का हिस्सा हैं।……….यह परिवार और दोस्तों से जुड़े रहने का बहुत बड़ा और बेहतरीन साधन है, लेकिन यहां से गलत सूचनाएं भी उतनी ही तेजी से फैल सकती हैं और ऐसा हो चुका है।

मूर्ति के मुताबिक ज्यादातर भारतीय और भारतीय अमेरिकी सोशल मीडिया पर सूचनाओं को बिना सोचे फॉर्वर्ड कर देते हैं, लेकिन यहीं पर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। वो कहते हैं, ‘आप खुद को याद दिलाएं कि स्रोत मायने रखता है, ठीक है…..और स्रोत आपके अंकल या आंटी या बहन या भाई नहीं हैं, जिन्होंने आपको व्हाट्सऐप भेजा है। स्रोत वह व्यक्ति है,जिसने उस कंटेंट को तैयार किया है, जिसने वह वीडियो बनाया है और पोस्ट किया है, ठीक है….’

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