महामारी घोषित होने से पहले ही चीन की सेना के वैज्ञानिक ने रजिस्टर्ड करवाया था कोरोना वैक्सीन- बड़ा खुलासा

महामारी घोषित होने से पहले ही चीन की सेना के वैज्ञानिक ने रजिस्टर्ड करवाया था कोरोना वैक्सीन- बड़ा खुलासा

बीजिंग: कोरोना वैक्सीन को लेकर बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। खुलासा हुआ है कि कोरोना वायरस के महामारी घोषित होने से पहले ही चीन की सेना ने कोरोना वायरस वैक्सीन को रजिस्टर्ड करवा लिया था। खुलासा ये भी हुआ है कि चीन की सेना वुहान लैब में ‘वैट वुमन’ के साथ काम कर रही थी। ये खुलासा तब हुआ है, जब पता चला है कि चीन के एक वैज्ञानिक, जिनका अमेरिका से करार है, उन्होंने कोरोना वैक्सीन पेटेंट करवाने के लिए आवेदन दिया था। ये आवेदन चीन के वैज्ञानिक ने तब दिया था, जब कोरोना वायरस दुनिया में फैलना ही शुरू हुआ था और डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस संक्रमण को महामारी घोषित नहीं किया था।

युसेन झोउ नाम के नेता, जो चीन की सेना और कम्यूनिस्ट पार्टी से जुड़े हुए हैं, उन्होंने चीन की पॉलिटिकल कम्यूनिस्ट पार्टी के बिनाह पर 24 फरवरी 2020 को ही कोरोना वैक्सीन को पेटेंट करवाने के लिए आवेदन दे दिया था और उसके लिए कागजी कार्रवाई शुरू हो चुकी थी। ये खुलासा ऑस्ट्रेलियाई न्यूजपेपर ‘द ऑस्ट्रेलियन’ ने किया है। ऑस्ट्रेलियाई न्यूज पेपर के इस खुलासे ने चीन की पोलपट्टी खोलकर रख दी है और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और गरमा गई है। ऑस्ट्रेलियाई न्यूज पेपर के मुताबिक चीन ने जब पहली बार कोरोना वायरस संक्रमण को इंसानों से इंसानों में फैलने वाला वायरस माना था, उसके पांच हफ्तों के बाद ही चीन की पॉलिटिकल पार्टी कम्यूनिस्ट पार्टी की सेना पीएलए की तरफ से युसेन झोउ ने कागजी कार्रवाई के लिए आवेदन दिया था। युसेन झोउ ने यह भी माना है कि वो चीन की सेना पीएलए की तरफ से वुहान लैब ऑफ वायरोलॉजी के वैज्ञानिकों के साथ काफी नजदीकी से काम कर रहे थे। युसेन झोउ वुहान लैब की उस महिला वैज्ञानिक शी झेंग्लि के साथ भी काफी करीब से काम कर रहे थे, जो वुहान लैब की डिप्टी डायरेक्टर हैं, जो कोरोना वायरस को लेकर चमगादड़ों पर रिसर्च करने के लिए विख्यात हैं।

ऑस्ट्रेलियन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता युसेन झोउ और वुहान लैब की डिप्टी डायरेक्टर शी झेंग्लि के बीच का संबंध बताता है कि वुहान लैब से ही कोरोना वायरस निकला था और चीन को कोरोना वायरस को लेकर पूरी जानकारी थी और चीन को कोरोना वायरस के बारे में ये भी पता था कि ये वायरस इंसानों से इंसान में फैलता है लेकिन उसने वायरस को पूरी दुनिया में फैलने दिया। ऑस्ट्रेलियन अखबार के मुताबिक कोरोना वायरस वैक्सीन को पेटेंट कराने के लिए आवेदन देने के सिर्फ तीन महीने बाद ही युसेन झोउ की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वहीं, द न्यूयॉर्क पोस्ट ने दावा किया था कि युसेन झोउ, चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी में बड़े ओहदे पर थे, लेकिन उनकी मौत को चीन के सिर्फ एक अखबार में सिर्फ एक बार ही छोटे से कॉलम में छापा गया था। जबकि युसेन झोउ, कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता होने के साथ साथ चीन की सेना के लिए तो काम करते ही थे, जबकि वो चीन के प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक थे। ऐसे में किसी और अखबार द्वारा उनकी मौत को रिपोर्ट नहीं करना बहुत बड़ी साजिश की तरफ इशारा करता है।

ऑस्ट्रेलियन अखबार के मुताबिक युसेन झोउ पहले अमेरिका के रिसर्च ऑर्गेनाइजेशनों के साथ भी काम किया करते थे। जिसमें यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा और न्यूयॉर्क ब्लड सेंटर भी शामिल हैं। वहीं, पिछले कुछ हफ्तों में विश्व के कई वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के पीछे चीन का हाथ बताते हुए निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है। आपको बता दें कि वुहान लैब से ही वायरस की उत्पत्ति हुई थी, इसे सबसे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहना शुरू किया था, लेकिन दुनिया के प्रमुख मीडिया ऑर्गेनाइजेशंस और संस्थानों ने उनके दावे को गलत कहा था। 2 दिन पहले भी डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहा है, वहीं जो बाइडेन जब विपक्ष में थे, तो उन्होंने कोरोना वायरस के पीछे चीन का हाथ होने से इनकार कर दिया था, लेकिन पिछले हफ्ते उन्होंने अमेरिकन इंटेलीजेंस एजेंसियों को कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने का ऑर्डर दिया है।

अमेरिका की सरकार ने अमेरिका के दर्जनों प्रयोगशालाओं को हुक्म दिया है कि वो इंटेलीजेंस एजेंसी को पूरी तरह से मदद करें और कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने में सहयोग करें। वहीं, चीन लगातार अपना बयान बदल रहा है। पहले चीन ने कहा था कि वुहान मीट बाजार से कोरोना वायरस निकला है, लेकिन कुछ महीनों के बाद उसने कोरोना वायरस के मीट बाजार से निकलने की बात से इनकार कर दिया और कहने लगा कि दुनिया के किसी और देश से कोरोना वायरस चीन पहुंचा है। वहीं एक बार चीन ने ये भी कह दिया कि कोरोना वायरस अमेरिका से निकला हुआ है। वहीं, कई वैज्ञानिकों ने ये भी दावा किया है कि यूएस मीडिया ने डोनाल्ड ट्रंप को नीचा दिखाने के लिए चीन को क्लिन चिट दे दिया था और डोनाल्ड ट्रंप ने जो चीन की बात की थी, उसे नकारते हुए ट्रंप को ही निकम्मा दिखाने की कोशिश की थी। वहीं, चीन ने पिछले हफ्ते कहा है कि वो अब किसी भी जांच का ना ही हिस्सा बनेगा और ना ही डब्ल्यूएओ को चीन में जांच करने करने की इजाजत देगा।

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