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आजमीन-ए-हज के लिए दारुल उलूम का फतवा, दिखावे से बचें हाजी

Darul_Uloom_Deoband

सहारनपुर। विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद ने इस्लाम के पांचवे अहम रुकन (भाग) हज ए बेतुल्लाह के मौके पर लोगों द्वारा बना ली गई रसमों पर फतवा जारी करते हुए कहा है कि शान ओ शौकत के लिए किया गया हज कुबूल नहीं होता है। मुफ्तियाने किराम ने हिदायत की कि अपने गुनाहों और बुराइयों से तौबा कर हज पर जाने का इरादा करना चाहिए।

अगस्त माह के अंत में हज ए बेतुल्लाह होगा। १७ जौलाई से दुनिया भर से लोग हज करने के लिए सऊदी अरब पहुंचना शुरू हो जाएंगे। इस्लाम का बेहद अहम रुकन (भाग) होने के बावजूद लोगों ने हज पर जाने से लेकर वापस लौटने तक लिए कई रसमें बना ली हैं। इन्हीं के सम्बंध में नगर के ही फैजी सिद्दीकी ने दारुल उलूम देवबंद के इफ्तवा विभाग से लिखित सवाल किया है। सिद्दीकी ने पूछा है कि हज पर जाने से पहले और आने के बाद अपनी शौहरत के लिए लिए बड़ी-बड़ी दावतें करना, फोटो व वीडियो ग्राफी कराना, हाजियों का जुलूस की शक्ल में आना व जाना, इस दौरान फूल मालाओ का पहनना, हज यात्रियों को रसमन तोहफे देना और मक्का व मदीना (सऊदी अरब) में कबूतरों को दाना खिलाने के लिए पैसे आदि देना कैसा है। क्या इस तरह की रसमें शरई ऐतबार से दुरुस्त हैं।

पूछे गए सवाल के जवाब में दारुल उलूम देवबंद के इफ्ता विभाग के मुफ्तियों की खंड पीठ ने जारी किये फतवे में साफ किया है कि इस तरह की रस्मों की इस्लाम में कोई जगह नही है। फतवे में कहा गया है कि हज इस्लाम मजहब की बड़ी इबादतों में शुमार है। हज का इरादा करने से पहले इंसान को अपने तमाम गुनाहों और बुराइयों से तौबा कर लेनी चाहिए। और साफ सुथरी जिंदगी गुजारने का अजम कर लेना चाहिए। हाजी को झूठ, फरेब और बदजुबानी से बचना चाहिए और शोहरत के लिए दावत आदि नहीं करनी चाहिएं, क्योंकि अल्लाह दिखावे को पसंद नहीं करता है। फतवे में कहा गया है कि फोटो व वीडियो ग्राफी कराना सख्त हराम और दिखावे के लिए बसों में भर कर हाजी को छोडऩे और लेने जाना, नारेबाजी करना, फूलों के हार डालना, बदले की उम्मीद से तोहफे देना बड़ा गुनाह है। इन सब बातों से हज इंदल्लाह मरदूद हो जाने का अंदेशा हो जाता है।

कहा कि मक्का व मदीना के कबूतरों के दाने के लिए रुपये आदि देना जायज नहीं है। हाजियों को चाहिए कि वह सभी रसमों को छोड़ते हुए बेहद सादगी के साथ हज के लिए जाएं और ऐसे ही वापस आएं। अलबत्ता सुन्नत के मुताबिक घर से एयरपोर्ट तक एक दो लोगों के आने जाने में कोई हर्ज नहीं है। मुफ्तियाने किराम ने नसीहत करते हुए कहा कि आजमीन-ए-हज (हज यात्रियों) को सफर के दौरान हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रखना जरूरी है जिससे उसके हज के सभी अरकान व आदाब पूरे हो सकें।

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