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घरों में सज रहे थे शादी के शामियाने, लेकिन बिछ गई लाशें

रुड़की : एक तरफ शादी के शामियाने तो दूसरी तरफ मौत का मंजर। ऐसा नजारा पहले शायद ही किसी ने कभी देखा हो। गांव में शादी के लिए पहले से ही रस्मोरिवाज के लिए तारीखें तय थीं, लेकिन ग्रामीणों को क्या पता था कि शादी के खुशी के माहौल पर मौत का गम भारी पड़ेगा। ग्रामीणों के सामने इस मंजर को बयां करने के लिए शब्द नहीं थे। भलस्वागाज में शुक्रवार को दो शादियां थी। एक शादी तो मृतक के चचेरे भाई की ही थी। गुरुवार को जहरीली शराब पीने से उनकी मौत हो गई। खुशी और गम के माहौल में मातम भारी पड़ रहा था।

दुखी मन से शादी की रस्में पूरी कर रहे लोग कह रहे थे कि उन्हें क्या पता था कि खुशी से पहले दुख की घड़ी आ जाएगी। गांव में मातम का माहौल है, फिर भी शादी की तय तारीख पर दुखी मन से रस्में पूरी की जा रही है। भलस्वागाज में बीर सिंह पुत्र मंगल सिंह (40) की देर रात मौत हो गई। उनके बड़े भाई मुआसीराम ने बताया कि छोटे भाई के शव का इंतजार कर रहे हैं। बीर सिंह की तीन बेटियां और दो बेटेहैं, लेकिन कमाई का कोई साधन नहीं है। बीर सिंह किसी तरह मेहनत मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते थे|

लेकिन अब परिजनों को चिंता है कि परिवार को कौन पालेगा। मृतक बीर सिंह के घर पर जहां दुख व्यक्त करने के लिए लोगों का जमावड़ा लगा था तो उनके घर के ठीक सामने शादी का शामियाना लगा था, जिसमें खाने की तैयारी की जा रही थी। मुआसीराम ने बताया कि उनके चचेरे भाई की भी गांव के दूसरे मोहल्ले में शादी में है। मौत का दुख है, लेकिन भारी मन से रिवाजों को तो पूरा करना ही होगा। ग्रामीण एक साथ खुशी और गम के पलों को न देख पा रहे थे और न ही कुछ समझ पा रहे थे। ऐसा लग रहा था मानों बेबस और लाचारी के बीच ही सब कुछ चल रहा था।

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