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आतंकवाद और मानवाधिकार दोनों अलग नहीं : पदमश्री चमनलाल

Terrorism and human rights are no different: Padamashree Chaman Lal

सहारनपुर। नागालैंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक और आप्रेशन ब्लैक थंडर के दौरान पंजाब के आई जी रहे पद्मश्री चमनलाल ने आतंकवादी गतिविधियों को लेकर कहा है मीडिया की भूमिका इसमें काफी महत्वपूर्ण रहती हैं। मीडिया को सोच समझकर अपनी भूमिका का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद तभी जीतता है जब उस पर हम वैसी प्रतिक्रिया देते हैं जैसी वे चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवादी चाहते है कि उनके हमलों में ज्यादा से ज्यादा लोग मारे जाए, चूंकि वह सोसायटी को एक संदेश देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में के पी एस गिल ने मीडिया का सही इस्तेमाल किया था वह मीडिया के माध्यम से लोगों को यह समझाने में कामयाब रहे थे कि ये किसी अच्छे कार्य या जनहित के लिए नहीं लड़ रहे है, बल्कि ये तो अपराधी हैं। उन्होंने कश्मीर में जो आज पत्थरबाजी कर रहे हैं उनका गिलानी आदि से कोई लेना देना नहीं है। आज जरुरत इस बात की है कि हम उनकी इस मानसिकता को समझे और उन्हें समझाने की कोशिश करें।
शुक्रवार को चमनलाल यहां जैन डिग्री कालेज के सभागार में राजनीति शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ‘‘आतंकवाद एवं मानवाधिकार’’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘आतंकवाद और मानवाधिकार’ दोनों अलग नहीं हैं। यह सही है कि अधिकार आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते, लेकिन हमें आतंकवाद पर काबू पाने में तब सफलता मिलेगी जब हम आतंकवाद के खतरे को समझते हुए मानवाधिकार के महत्व को भी समझे। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज एक बड़ा खतरा है और यह संपूर्ण मानव जाति के लिए है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को परिभाषित करना काफी मुश्किल है, इसकी करीब 130 परिभाषाएं हैं,मोटे तौर पर राजनीतिक परिणाम हासिल करने का ये एक नया तरीका है। जब कुछ लोगों को ये लगता है कि लोकतांत्रिक तरीके से उनकी मांग पूरी नहीं हो सकती तब वे लोग यह रास्ता अपनाते हैं। इसमें कौन, कब, कहा शिकार हो जाए, कोई नहीं जानता। इसमें निर्दोष मारे जाते हैं।आतंकवाद और मानवाधिकार दोनों अलग नहीं : पदमश्री चमनलालउन्होंने कहा कि मानवाधिकार को लेकर लोगों में कुछ गलत धारणाएं हैं। कुछ लोग केवल गिरफ्तारी, सर्च, फर्जी मुठभेड़ और हिरासत तक ही मानवाधिकारों को देखते है, लेकिन मानवाधिकार की परिधि इससे काफी आगे है। मानवाधिकार की मूल अवधारणा ये है कि सभी मनुष्यों को बिना किसी भेदभाव के गरिमा से जीने का अधिकार हैं। मानवाधिकार मनुष्य का नैसर्गिक अधिकार है, न तो ये सरकार की मेहरबानी से मिले हैं और न ये अर्जित किये गए हैं। उन्होंने कहा कि मानव परिवार में जन्म के साथ हमें मानवाधिकार मिले हैं तथा राज्य और प्रशासन का यह दायित्व है कि वे व्यक्ति के इन मानवाधिकारों की रक्षा करें।
उन्होंने कहा कि लेकिन मानवाधिकारों का अर्थ ये कदापि नहीं है कि आप कमज़ोर है, आप फोर्स का इस्तेमाल न करें, कानून ने जो अधिकार आपको दिए है उनके अनुसार सख्ती न करें, लेकिन यह जरुर है कि उनका क्रियान्वयन ईमानदारी से करें। ‘तमगे’ हासिल करने के लिए कानून का दुरुपयोग न करें। अपराधी को अपराध के हिसाब से सजा दें, लेकिन उसके मानवाधिकारों का भी ख्याल ररखें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पुलिस को खुली छूट नहीं दी जा सकती। लेकिन राज्यों का ये कर्तव्य है कि वह ऐसा माहौल दे और पुलिस को इतना सक्षम और संवेदनशील बनाएं कि वह ईमानदारी से अपना काम कर सके।
इससे पूर्व राजनीतिशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वी के शर्मा ने चमनलाल का परिचय दिया और व्याख्यान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्राचार्य प्रदीप वार्ष्णेय ने बुके देकर उनका स्वागत किया। मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन से कार्यक्रम की शुरुआत हुयी। पूर्व विधायक वीरेन्द्र ठाकुर व कांग्रेस नेता महेन्द्र तनेजा ने स्मृति चिह्न और साहित्यकार डॉ. वीरेन्द्र आज़म व यशपाल भाटिया ने शॉल ओढ़ाकर पद्मश्री चमनलाल का अभिनंदन किया। त्रिलोकचंद गुप्ता व तेज क्वात्रा ने मुख्य अतिथि को उपहार भेंट किया। कार्यक्रम में कालेज के सभी विभागों के लेक्चरर व बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे। डॉ. वीके शर्मा ने संचालन किया।

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