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रूस: वैंपायर की तरह अपने दोस्त का खून पीने वाला डॉक्टर गिरफ्तार

मॉस्‍को: रूस में शुक्रवार को एक ऐसे व्‍यक्ति पर आरोप तय किए हैं जिसने बिल्‍कुल किसी वैंपायर की तरह अपने बेस्‍ट फ्रेंड की हत्‍या कर दी थी। हत्‍या 21 वर्ष पहले हुई थी और पिछले कुछ समय से यह यह व्‍यक्ति नकली डॉक्‍टर बनकर अपनी जिंदगी काट रहा था। कोर्ट ने इस व्‍यक्ति के बारे में उसकी बहन और मां को भी नहीं मालूम था। इस व्‍यक्ति का नाम बोरिस कॉनदरशिन है और इसकी उम्र 36 वर्ष बताई जा रही है। बोरिस के पास से नकली डॉक्‍यूमेंट्स मिले हैं जिनसे साबित होता है कि वह डॉक्‍टर बनकर लोगों को बेवकूफ बना रहा था। कॉनदारशिन खुद को एक वैंपायर समझता है। साल 1998 में अपने एक 16 वर्षीय दोस्‍त को पहले इंजेक्‍शन लगाया, फिर उसकी बॉडी को काटा। इसके बाद उसने उसका खून पी लिया।

बोरिस ने जो कुछ भी किया उस पर एक सेकेंड के लिए किसी को भी यकीन नहीं हुआ। अगस्‍त 2000 में बोरिस को एक मनोचिकित्‍सा अस्‍पताल में भर्ती कराया गया जहां पर डॉक्‍टरों ने उसे होमीसाइडल स्‍क्रेजो‍फ्रेनिया से ग्रसित पाया। बोरिस क्‍या करता था, डॉक्‍टरों को भी इसका पता नहीं लग पा रहा था। बोरिस चेलयाबिनस्‍क के उराल्‍स में स्थित एक अस्‍पताल में डॉक्‍टर के तौर पर काम कर रहा था। उसे नवंबर 2018 में यहां पर नौकरी मिली थी और इसके लिए उसने नकली डॉक्‍यूमेंट्स का सहारा लिया था। बोरिस को साल 2000 में डॉक्‍टरों ने अनिवार्य इलाज के लिए अस्‍पताल में भेजा था। 10 वर्ष बाद उसे अस्‍तपाल से छुट्टी दे दी गई थी। कॉनदरशिन को चेलयाबिनस्‍क के सिटी हॉस्पिटल नंबर 11 में बतौर प्राइमरी केयर डॉक्‍टर की नौकरी मिली थी।

यहां पर उसका काम लोगों को शराब न पीना और ध्रूमपान न करने के लिए प्रोत्‍साहित करना था। इसके साथ ही इन लोगों को एक्‍सरसाइज के फायदे बताना भी उसकी नौकरी का हिस्‍सा था। हेल्‍थ डिपार्टमेंट की नातालया गोरलोवा की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। नतालया ने बताया कि बोरिस अपने वर्क एक्‍सपीरियंस के बारे में नहीं बता पाया था क्‍योंकि यहां पर नौकरी मिलने के समय उसने रिकॉर्ड्स खोने की बात कही थी। जनवरी में उस मनोचिकित्‍सर ने बोरिस को एक मेडिकल इवेंट में देखा और वह उसे देखते ही हैरान हो गए थे। इसी डॉक्‍टर ने बोरिस का इलाज किया था। यहां से उसकी सच्‍चाई सबके सामने आई। इसके बाद हास्टिपल ने उसके डॉक्‍यूमेंट्स चेक किए और उसे अस्‍पताल से निकाल दिया गया।

बोरिस की बहन भी एक डॉक्‍टर हैं। उन्‍होंने स्‍थानीय मीडिया को बताया कि न तो उन्‍हें और न ही उनकी मां को इस बात की कोई जानकारी थी कि बोरिस को नौकरी मिल गई है। उसके पास सिर्फ हाई स्‍कूल तक की शिक्षा थी। उन्‍होंने बताया कि उसे अस्‍पताल से इसलिए छुट्टी मिल गई थी क्‍योंकि लोगों को उससे किसी तरह का कोई खतरा नहीं था। लेकिन इसके बाद भी उसे निगरानी में रखा जाना था।

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