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कांग्रेस विधायक को रोकने वाले दोनों पुलिसकर्मी की लाइन हाजिर

देहरादून : उत्तराखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन के पटल पर रखे जाने वाले छह विधेयक अधिनियम बन जाएंगे। आज जौलीग्रांट हवाई अड्डे का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखे जाने के संबंध में सरकारसंकल्प लाएगी। जिसे पारित करने के बाद केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। दूसरे दिन सदन की शुरुआत हंगामे से हुई। हुआ यूं कि कांग्रेस विधायक करण मेहरा को विधानसभा के गेट पर रोक दिया गया। जिस कारण कांग्रेस विधायक विस गेट पर ही धरने में बैठ गए। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर अभद्रता का आरोप लगाकर गेट पर ही हंगामा कर दिया।

इस दौरान उनकी पुलिस अधिकारियों से कहासुनी भी हुई। इस पर कांग्रेस ने सदन से वॉक आउट कर दिया। करण मेहरा की सरकारी गाड़ी को विधानसभा में प्रवेश देने से रोकने पर उनके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री प्रीतम सिंह जी, नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश, विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, फुरकान अहमद, राजकुमार, आदेश चौहान, मनोज रावत, हरीश धामी, ममता राकेश विधानसभा के गेट पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिस कर्मी को सस्पेंड करने की मांग की। संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पन्त मान-मनोव्वल को पहुंचे। जिसके बाद कांग्रेस विधायक को रोकने वाले दोनों पुलिस कर्मचारियों को लाइन हाजिर करने के आदेश दिए गए।

लेकिन फिर भी कांग्रेसी नेताओं का धरना जारी रहा। जिसके बाद सदन की कार्यवाही शाम छह बजे तक स्थगित कर दी गई। वहीं आज रखे जाने वाले विधेयकों में 19 सितंबर को पारित न्यायालय शुल्क (उत्तराखंड संशोधन) विधेयक और उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम, 1964) अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश संशोधन विधेयक। 20 सितंबर को पारित उत्तराखंड माल एवं सेवाकर (संशोधन) विधेयक, उत्तरखंड (उत्तरप्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959) संशोधन विधेयक, उत्तराखंड नगर निकायों एवं प्राधिकरणों के लिए विशेष प्राविधान विधेयक और उत्तराखंड सेवा निवृति लाभ (संशोधन) विधेयक अधिनियम बनेंगे।

इसके अलावा सदन के पटल पर उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950) अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश 2001 संशोधन अध्यादेश आएगा। यह अध्यादेश सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट के बाद निवेशकों को पर्वतीय जनपदों में आकर्षित करने के लिए लाया था। इसके तहत 12.5 एकड़ भूमि खरीद पर राजस्व नियमावलियों का सरलीकरण किया गया है। लोकसेवा आयोग के सप्तदश वार्षिक प्रतिवेदन और सेवा का अधिकार अधिनियम के अधीन उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन पटल पर रखा जाएगा।

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