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गडकरी ने दिए दिसंबर तक नमामि गंगे परियोजना पूरी करने के निर्देश, जानें कितना काम हुआ पूरा

देहरादून: केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तराखंड नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत आने वाली सभी परियोजनाओं की दिल्ली में समीक्षा की। इस दौरान गडकरी ने सभी संबंधित अधिकारियों को परियोजना को दिसंबर 2018 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। मंत्री ने सभी अधिकारियों को सरकार, जिला प्रशासन और नगर निगम के साथ मिलकर इस कार्य को सफलता पूर्ण तरीके से इसके मुकाम तक पहुंचाने को कहा। बीते सोमवार को हुई मीटिंग में केंद्रीय मंत्री गडकरी ने परियोजना में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से संबंधित सभी बुनियादी ढांचे का काम पूरा करने, घाटों की सफाई करने और दिसंबर 2018 तक श्मशान बहाल करने के भी अधिकारियों और ठेकेदारों को निर्देश दिए। बैठक में कहा गया कि जानवरों के लिए भी श्मशान का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि गंगा नदी और अन्य जल निकायों में जानवरों के मृत शरीर पड़े होने की समस्या से निपटा जा सके।

इस दौरान गडकरी ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल सरकारें हाउस सर्विस कनेक्शन (एचएससी) के लिए घर धारकों को मौद्रिक सहायता दे रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को उत्तराखंड राज्य सरकार के साथ इस मुद्दे को उठाने और एचएससी को मुख्य सीवर लाइन से जितनी जल्दी हो सके प्रदेश को लिंक करने का निर्देश दिया। बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सुझाव दिया कि देहरादून और हरिद्वार में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले दूषित जल का इस्‍तेमाल सिंचाई के लिए करने की संभावनाओं भी का पता लगाया जाना चाहिए। उत्तराखंड में 31 स्वीकृत एसटीपी परियोजनाओं में से 16 पूरी हो गई हैं और शेष 15 एसटीपी पर काम प्रगति पर है। उत्तराखंड में वर्ष 2035 में प्रोजेक्टेड सीवरेज पीढ़ी 122 एमएलडी (प्रति दिन लाख लीटर) है।

जबकि मौजूदा उपचार क्षमता 97.6 एमएलडी है। कार्यान्वयन के तहत परियोजनाएं पूरा होने के बाद 131.7 एमएलडी सीवेज के इलाज की क्षमता पैदा करेंगी। नये एसटीपी संयंत्र बनाए जाने और पुराने संयंत्रों के उन्‍नयन के अलावा राज्‍य में 21 घाट और 22 शवदाह गृह बनाने का भी काम चल रहा है। इनमें से 10 घाट और 9 शवदाह गृह बनाए जा चुके हैं और बाकी के घाट और शवदाह गृह इस साल के अंत तक बनकर तैयार हो जाएंगे। गौर हो कि 20 हजार करोड़ के नमामि गंगे मिशन में 298 परियोजनाएं शामिल हैं- 194 में एसटीपी, ग्रामीण स्वच्छता और बायोमेडिएशन का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें  उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड शामिल है क्योंकि अधिकांश प्रदूषण के लिए यही शहर जिम्मेदार हैं।

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