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जानिए कैसे ISRO का पीएसएलवी-सी 43, फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण पर रखेगा नजर

श्रीहरिकोटा: इंडियन स्‍पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने गुरुवार को पीएसएलवी-सी43 को लॉन्‍च कर दिया। इसरो का यह अर्थ ऑब्‍जर्वेशन सैटेलाइट 30 माइक्रो और नैनो सैटेलाइट्स के साथ लॉन्‍च हुआ है। 23 अमेरिकी सैटेलाइट्स के साथ इसरो ने कुल आठ देशों के सैटेलाइट्स को लॉन्‍च किया है। गुरुवार को तय समय सुबह 9:58 बजकर पीएसएलवी-सी 43 को लॉन्‍च किया गया। 16 घंटे का काउंटडाउन बुधवार शाम शुरू हुआ था। इसरो के लिए पीएसएलवी-सी43 का लॉन्‍च एक बड़ी सफलता है। इसरो ने कुल 31 सैटेलाइट्स को पोलर सैटेलाइट लॉन्‍च व्‍हीकल (पीएसएलवी-सी43) के जरिए लॉन्‍च किए गए। पीएसएलवी की यह 45वीं उड़ान है। भारत का सैटेलाइटस जिसे पीएसएलवी के जरिए लॉन्‍च किया गया वह एक हाइपर स्‍पेक्‍ट्रल सैटेलाइट है।

इसरो के मुताबिक इस सैटेलाइट के जरिए इंडस्‍ट्रीज से होने वाले प्रदूषण पर नजर रखी जा सकेगी। इस सैटेलाइट में कुछ और एप्‍लीकेशंस होंगी जो कृषि, जंग, भू-विज्ञानी, तटीय इलाकों के अध्‍ययन और जमीन के अंदर मौजूद पानी पर रिसर्च में प्रयोग लाई जा सकेगी। इसरो के एक अधिकारी की ओर से बताया गया है सैटेलाइट पृथ्‍वी के ऊपर से नजर रखेगा। यह सैटेलाइट मिट्टी, पानी, वनस्पितयों और दूसरे क्षेत्रों से जुड़े जरूरी डाटा उपलब्‍ध कराने में मदद करेगा। वैज्ञानिक जिस पर भी रिसर्च करना चाहेंगे, उसका चयन कर सकते हैं लेकिन इस सैटेलाइट की मदद से प्रदूषण पर नजर रखने में खासी मदद मिल पाएगी। इस सैटेलाइट का कुल वजन करीब 380 किलोग्राम है। इसे 636 किलोमीटर वाली ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

यहां से कोई भी सैटेलाइट पृथ्‍वी के भौगोलिक इलाके से उस समय गुजर सकता है जब सूरत का झुकाव उसी तरह से हो। इस सैटेलाइट की मिशन लाइफ पांच वर्ष है। पीएसएलवी-सी43 में एक हाइपरस्‍पेक्‍ट्रल इमेजिंग सैटलाइट हैं, एक माइक्रो सैटेलाइट और 29 नैनो-सैटेलाइट्स हैं। जिन आठ देशों के सैटेलाइट इस मिशन में शामिल हैं उनमें ऑस्‍ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, फिनलैंड, मलेशिया, नीदरलैंड, स्‍पेन और अमेरिका के हैं। अमेरिका के 23 सैटेलाइट्स हैं। अब तक पीएसएलवी ने 52 भारतीय और 28 देशों के 239 अंतरराष्‍ट्रीय सैटेलाइट्स को लॉन्‍च किया है। इसरो की नजरें अब पांच दिसंबर को फ्रेंच गुएना के कोउरोउ से होने वाले जीसैट-11 के लॉन्‍च पर है। यह एक कम्‍यूनिकेशन सैटेलाइट है जिसका वजन 5,854 किलोग्राम है। यह अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट है जिसे भारत के लॉन्‍च व्‍हीकल की मदद से लॉन्‍च किया जाएगा।

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