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स्वतंत्रता आंदोलन : फांसी पर लटकाने के बाद शव के साथ किया जाता था ये काम, VIDEO


सहारनपुर। क्या आपको पता है कि जिस वक्त देश में आजादी का आंदोलन चलाया जा रहा था, उस वक्त आजादी के मतवालों को फांसी पर लटकाने के बाद अंग्रेजी फौज शव का क्या करती थी। यदि नहीं तो यह आर्टिकल आपके लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है।
यह तो सभी जानते हैं कि आजादी के आंदोलन के दौरान अंग्रेजी सिपाहियों अथवा फौज द्वारा ब्रिटिश हकुमत के खिलाफ बोलने वाले को कड़ी सजा दी जाती थी। सजा भी ऐसी कि फांसी पर लटका दिया जाता था, वह भी पेड़ पर। उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जनपद क्रांति धरा रहा है। यहां पर न केवल शहीद भगत सिंह आए, बल्कि अंग्रेजी शासन के नमक कानून को यहां पर तोड़ा गया। यहां के फुलवारी आश्रम में नमक कानून को तोड कर खुद का नमक तैयार किया गया, वह भी मात्र दो घंटे में।

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चलिए अब बात करते हैं कि उस दौरान ब्रिटिश फौज द्वारा फांसी पर लटकाए जाने के बाद शव के साथ क्या किया जाता था। स्वतंत्रता आंदोलन पर रिसर्च करने वाले वरिष्ठ पत्रकार डाक्टर वीरेंद्र आजम बताते हैं कि आंदोलन के दौरान यदि कोई शख्स ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज को बुलंद करता था तो उसे पेड़ पर फांसी पर लटका दिया जाता था। फांसी दिए जाने के बाद किसी को भी शव को नीचे उतारने की इजाजत नहीं दी जाती थी। कई कई दिनों तक शव पेड़ पर लटका रहता था। उस वक्त तक जब तक शव से बदबू न आना शुरू हो जाए। यह इसलिए किया जाता था ताकि लोगों में ब्रिटिश हकुमत का भय बना रहे।

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पेड़ पर फांसी पर लटके शव के कई दिनों तक लटके रहने के साथ शव से बदबू आना शुरू हो जाती थी। यह इसलिए होता था कि लोग समझ जाए कि यदि किसी ने बोलने की हिम्मत की तो उसका शव भी इसी तरह से लटका दिया जाएगा और इसी तरह से बदबू उठती रहेगी। बाद में जब शव सडने की नौबत पर आ जाता था तो अंग्रेजी सिपाही शव को नीचे उतारते थे तथा जला दिया जाता था।

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