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पिता ने कर्ज चुकाने के​ लिए बेचे अपने ही दो बेटे, 2 हजार रूपये में

कृष्णागिरी: छह साल पहले एक पिता ने अपनी मामूली जेब खर्च के लिए अपने दो बेटों को 2000 हजार रुपए में बेच दिया था। पांच साल के कम उम्र के ये बच्चे एक एनजीओ की मदद से 6 साल बाद एक बार फिर से अपनी मां से मिल सके। बच्चों को उनकी मां से मिलवाने वाले रेवेन्यू डिविजनल ऑफिसर(RDO) और नेशनल आदिवासी सॉलिडेरिटी काउंसिल ने (NASC)अहम भूमिका निभाई। 6 साल बाद जब एस अरुण कुमार अपनी मां एस वल्ली के गले लगा तो हर कोई उनके प्यार को देखकर भावुक हो गया।  दो दिन पहले नेशनल आदिवासी सॉलिडेरिटी काउंसिल को एक 11 साल का बच्चा शूलागिरी तालाब के पास बैठा मिला था। यह बच्चा वहां तैरती हुई बतखों को देख रहा था। NASC के वर्करों ने बच्चे को वहां से रेस्क्यू कर उसे दफ्तर लाए।

यहां बच्चे की काउंसलिंग की गई। काफी प्रयास के बाद बच्चे के घर का पता लगा लिया गया। नेशनल आदिवासी सॉलिडेरिटी काउंसिल के महासचिव के कृष्णन ने बताया कि, बच्चे की मां एस वल्ली के मुताबिक अरुण के पिता सरवनन ने एक किसान से 2,000 रुपये उधार लिए थे। कर्ज ना चुका पाने के चलते सरवनन ने अपने बेटे अरुण को एक बाबू नाम के शख्स को 2,000 रुपये में बेच दिया था। कृष्णन ने बताया कि बच्चों के पिता की तीन साल पहले मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद वल्ली के बच्चों का कोई सुराग नहीं था। अपने एक बेटे के मिलने के बाद वल्ली ने एनएएससी के अधिकारियों को बताया कि उसके पति ने उसके और बेटे को बेचा है। वल्ली ने बताया कि उसके पति ने उसका दूसरी बेटा सेल्वा वेल्लूर में एक व्यक्ति को बेच दिया गया था।

जिसके बाद एनएएससी के अधिकारियों ने खोजबीन शुरू कर दी। टीम ने तिरुपट्टूर की आरडीओ प्रियंका से संपर्क किया। सेल्वा को को टीम ने बरामद कर छुड़ा लिया है। वल्ली जल्द ही अपने दूसरे बेटे से मिलेगी। जिसे उसने 6 साल से नहीं देखा था। वल्ली के कुल पांच संताने हैं।

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