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70 साल बाद रेप के आरोप से मिली फ्लोरिडा के चार पुरुषों को रिहाई

फ्लोरिडा: अमेरिका के फ्लोरिडा राज्‍य में सात दशक के बाद रेप के चारों आरोपियों को कोर्ट ने निर्दोष मान कर रिहा कर दिया है। 70 वर्ष जब इन पुरुषों को निर्दोष बताते हुए रिहा किया जा रहा था तो इनमें से कोई भी जिंदा नहीं था। जी हां अश्‍वते मूल के इन सभी चारों पुरुषों की मृत्‍यु हो चुकी है और इन्‍हें शुक्रवार को रिहा किया गया। इन चारों पुरुषों को ग्रोवलैंड फोर नाम दिया गया था। अमेरिका का यह एक ऐसा केस बन गया था जिसने यहां पर रंगभेद और नस्‍लभेद को सामने लाकर रखा। कई लोगों ने फ्लोरिडा में अश्‍वेतों के इंसाफ के लिए लड़ाई भी लड़ी। जिन चार पुरुषों को आरोपी बताया गया था उनके नाम थे-सैम्‍सुल शेफर्ड, वॉल्‍टर इरविन, चार्ल्स ग्रीनली और अर्नेस्‍ट थॉमस। इन्‍हीं चारों को ग्रोवलैंड फोर का नाम दिया गया।

इन चारों को पिछले माह कोर्ट की ओर से निर्दोष माना गया था शुक्रवार को आधिकारिक बयान रिलीज किया गया। जज डे सैंटिस ने कहा, ‘कोई गलती नहीं करते हुए ये पुरुष असल में पीड़‍ित थे।’ उन्‍होंने आगे कहा, ‘इन चारों को एक ऐसे अपराध की गलत सजा मिली जो इन्‍होंने किया ही नहीं था।’ यह केस साल 1949 का है और फ्लोरिडा के ग्रोवलैंड में 17 वर्ष की एक लड़की ने रेप का आरोप इन चारों पर लगाया था। 17 वर्ष की युवती का नाम नोरमा पैडगेट्ट था। उन्‍होंने पुलिस को बताया कि चार ब्‍लैक पुरुषों ने उनका अपहरण किया और फिर उनका रेप किया। उनकी कार में भी तोड़-फोड़ की शिकायत नोरमा ने पुलिस से की थी। शिकायत पर पुलिस ने शेफर्ड, वॉल्‍टर इरविन, चार्ल्स ग्रीनली को गिरफ्तार किया।

इसके बाद इन्‍हें जेल में ले जाया गया जहां पर बेसमेंट में इनकी पिटाई की गई। वहीं, गुस्‍साई भीड़ ने शेफर्ड के घर में आग लगा दी थी। चौथे आरोपी थॉमस कीचड़ में छिपे हुए थे और 30 घंटे के बाद पुलिस ने उन्‍हें तलाश लिया। थॉमस को करीब 1,000 जवानों ने खोजी कुत्‍तों की मदद से तलाशा था। थॉमस पर केस चलता इससे पहले उन्‍हें गोली मार दी गई। ग्रीनली की उम्र उस वर्ष 16 वर्ष थी और उन्‍हें ऑल व्‍हाइट ज्‍यूरी ने उम्र कैद की सजा सुनाई। वहीं वर्ल्‍ड वॉर टू में हिस्‍सा ले चुके इरविन और शेफर्ड को मौत की सजा सुनाई गई। मौत की सजा के खिलाफ अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई लेकिन दूसरा ट्रायल शुरू होता, इससे पहले ही उन पर हमला हो गया। लेक काउंटी फ्लोरिडा के शेरिफ विलिस मैकॉल ने कहा कि वह अपने बचाव में आगे आए और उन्‍हें हथकड़ी पहने हुए दोनों व्‍यक्तियों को इसलिए ही गोली मारनी पड़ी।

इरविन जहां हमले में घायल हो गए थे तो वहीं शेफर्ड की मौत हो गई। अब इस केस में सिर्फ इरविन और ग्रीनली ही जिंदा बचे थे। अगले ट्रायल में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के जज बनने की तैयारी कर रह थ्रूगुड मार्शल ने उनका केस लड़ा। लेकिन उन्‍हें फिर से मौत की सजा सुना दी गई। कई वर्ष बाद इस सजा को उम्र कैद में बदला गया। 1968 में इरविन को पैरोल पर रिहा किया गया और एक वर्ष बाद ही यानी 1969 में उनकी मृत्‍यु हो गई। वहीं ग्रीनली को साल 1962 में जेल से रिहा गया किया। साल 2012 में 78 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। इस घटना पर एक किताब ‘डेविल इन द ग्रोव’ लिखी गई थी। साल 2013 में इस किताब को पुलित्‍जर पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया था।

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