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हनुमान जयंती : यहाँ स्त्री रूप में विराजमान है हनुमान जी, जिनकी पूजा से निःसंतान को मिलती है संतान

नई दिल्ली : कलयुग में रामभक्त हनुमान जी की उपासना से भक्त अपनी हर समस्या से छुटकारा पा लेता है। कुछ भक्त तो अब भी हनुमान जी का साक्षात्कार होने का दावा करते है। भारत में भगवान हनुमान जी के अनेको मंदिर हैं। हनुमान जी के ज्यादातर मंदिरों में कोई न कोई विशेषता है। झांसी के ग्वालियर रोड पर हनुमान जी का एक ऐसा मंदिर स्थित है, जहां हनुमान जी स्त्री वेश में विराजमान हैं। स्त्री वेश में होने के बाद भी उनके दोनों हाथ में गदा है। हनुमान जी के स्त्री वेश का वर्णन रामायण में भी मिलता है। कहा जाता है कि जनकपुरी में राम भक्त हनुमान ने सखी रुप धारण किया था।

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करीब 500 साल पुराने इस मंदिर में रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। यंहा के भक्त कहते है कि हनुमान जी को यहां रात के समय टहलते देखा जा चुका है। कई बार रात के समय मंदिर के घंटे अपने आप बजने लगते हैं। मंदिर के बारे में कथा है कि  करीब 500 साल पहले ओरछा में एक सखी बाबा नाम के संत थे। बाबाजी को स्वप्न आया कि हनुमान जी की प्रतिमा है। बाबा को एक स्थान पर हनुमान जी की सखी वेश में प्रतिमा मिली। प्रतिमा को बैलगाड़ी में रख कर बाबा चल दिए। झांसी से गुजरते समय शाम हो गई। बाबा ने ग्वालियर रोड स्थित एक पीपल के पेड़ के नीचे मूर्ति को रख दिया और आराम करने लगे। जब बाबा चलने लगे तो उनकी बैलगाड़ी का पहिया निकल गया, जिसको ठीक करवाने के लिए उन्हें वहां एक अोर दिन रुकना पड़ा। उन्हें फिर स्वप्न आया कि प्रतिमा को राम राजा के दरबार ओरछा के पास ही रहने दें। अगले दिन सखी बाबा ने प्रतिमा को वहीं स्थापित कर दिया। तभी से यह मंदिर यहां स्थापित है।

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मंदिर में हनुमान जी के दर्शनों के लिए देश के आलावा विदेशो से भी भक्त आते हैं। कहा जाता है कि यहां आने से भक्तों की हर इच्छाएं पूर्ण हो जाती है। कहा जाता है कि निःसंतान दंपति यहां लगातार 5 सोमवार विधिवत पूजा-अर्चना करे तो निश्चित रूप से संतान प्राप्ति होती है।

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